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पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची पर सुप्रीम कोर्ट में आज निर्णायक सुनवाई, SIR के खिलाफ खुद अदालत में दलील दे सकती हैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं अदालत में जिरह करती नजर आ सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इस संवेदनशील संवैधानिक मुद्दे पर सीधे अपनी दलीलें रखने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से अनुमति मांगी है।

खुद बहस करने की अनुमति के लिए अंतरिम आवेदन

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी कानूनी टीम के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक अंतरिम आवेदन दायर किया है, जिसमें उन्होंने आग्रह किया है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहस करने की अनुमति दी जाए। यदि न्यायालय से अनुमति मिलती है, तो वे मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर सीधे पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखेंगी। इस कदम को बंगाल की राजनीति में एक असाधारण और रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

चुनाव आयोग के SIR आदेशों को रद्द करने की मांग

मुख्यमंत्री की याचिका में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 24 जून 2025 और 27 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए SIR से संबंधित सभी आदेशों और निर्देशों को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही, उन्होंने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव 2025 अपरिवर्तित और वर्तमान मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं।

लाखों मतदाताओं के अधिकारों पर खतरे का दावा

ममता बनर्जी का तर्क है कि एसआईआर प्रक्रिया का 2002 की आधारभूत मतदाता सूची पर निर्भर होना और जटिल सत्यापन व्यवस्था अपनाना लाखों वास्तविक और योग्य मतदाताओं के मताधिकार के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के चलते बड़ी संख्या में वैध मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होगी।

टीएमसी सांसदों की याचिकाओं पर भी एक साथ सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, आज इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ करेगी।
पीठ तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और मोस्तरी बानू द्वारा दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर अलग याचिका को भी इसी प्रकरण के साथ सूचीबद्ध किया गया है।

बंगाल की राजनीति और चुनावी प्रक्रिया पर दूरगामी असर

इस सुनवाई को पश्चिम बंगाल की राजनीति और आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल राज्य की चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी नीतियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी दूरगामी असर डाल सकता है।


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