ओडिशा पुलिस को माओवादी उन्मूलन अभियान में एक और अहम सफलता मिली है। प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) से जुड़े लोकल गुरिल्ला स्क्वाड मेंबर (LGSM) ने संगठन छोड़कर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। सरेंडर करने वाले युवक की पहचान उम्बलन होनहागा उर्फ प्रभु (18 वर्ष) के रूप में हुई है।
साउथ छोटानागरा डिवीजन से जुड़ा था सरेंडर करने वाला माओवादी
प्रभु CPI (माओवादी) के SCN (साउथ छोटानागरा) डिवीजन के अंतर्गत सक्रिय था। वह LGSM कैटेगरी में संगठन के लिए काम कर रहा था और स्थानीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों में संलिप्त था।
सारंडा जंगल से माओवादी नेटवर्क की अहम कड़ी था हालामुली गांव
सरेंडर करने वाला प्रभु झारखंड के वेस्ट सिंहभूम जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र स्थित हालामुली गांव का निवासी है। यह गांव सारंडा रिजर्व फॉरेस्ट में स्थित है और CPI (माओवादी) के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है। यहां से संगठन के लिए किराना, दैनिक जरूरत की सामग्री और सूचना संकलन का काम किया जाता था।
मिलिशिया से LGSM तक: दो साल तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहा प्रभु
प्रारंभ में प्रभु ने संगठन के लिए मिलिशिया सदस्य के रूप में काम करना शुरू किया। वह इलाके में पुलिस गतिविधियों पर नजर रखने, सामान की व्यवस्था करने जैसे कार्य करता था।
साल 2024 में ‘बिरसा’ नामक माओवादी कैडर के संपर्क में आने के बाद उसे LGSM के रूप में औपचारिक रूप से भर्ती किया गया। इसके बाद वह करीब दो वर्षों तक माओवादी संगठन के साथ सक्रिय रहा।
माओवादी विचारधारा से मोहभंग और अत्याचार बने सरेंडर की वजह
अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, सरेंडर पॉलिसी से प्रभावित होने, संगठन की हिंसक माओवादी विचारधारा, वरिष्ठ माओवादी नेताओं द्वारा शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न, तथा इलाके में लगातार चल रहे कॉम्बिंग ऑपरेशनों के दबाव से प्रभु पूरी तरह टूट चुका था।
इन्हीं कारणों से उसने संगठन छोड़कर ओडिशा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया।
कैटेगरी ‘B’ में शामिल, मिलेगा ₹2.65 लाख तक का पुनर्वास पैकेज
सरेंडर के बाद प्रभु को राज्य की माओवादी सरेंडर एवं पुनर्वास नीति के तहत कैटेगरी ‘B’ में रखा गया है। इस श्रेणी के तहत उसे कुल ₹2,65,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
अविवाहित होने पर मिलेगा ₹25 हजार का विवाह प्रोत्साहन
सरेंडर करने वाला यदि अविवाहित है या उसका कोई जीवित जीवनसाथी नहीं है, तो उसे एकमुश्त ₹25,000 का मैरिज इंसेंटिव दिया जाएगा। यह राशि शादी के समय या विवाह संपन्न होने के बाद दी जाएगी।
स्किल डेवलपमेंट और ₹10,000 मासिक स्टाइपेंड की सुविधा
सरेंडर करने वाले को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत शॉर्ट-टर्म स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में निःशुल्क नामांकित किया जाएगा।
योग्यता के आधार पर वह वोकेशनल एजुकेशन भी प्राप्त कर सकेगा। इसके साथ ही अधिकतम 36 महीनों तक ₹10,000 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जाएगा।
हालांकि सरकारी नौकरी, प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट या स्व-रोजगार मिलने पर यह स्टाइपेंड बंद कर दिया जाएगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा और राशन योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
सरेंडर करने वाले को राज्य या केंद्र सरकार की नीति के तहत हेल्थ कार्ड प्रदान किया जाएगा, जिससे प्राथमिकता पर इलाज की सुविधा मिलेगी। साथ ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, अंत्योदय अन्न योजना या राज्य की अन्य पात्र राशन योजनाओं के अंतर्गत मुफ्त या सब्सिडी वाला राशन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
सुरक्षा बलों की रणनीति को मिली मजबूती
इस सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक अहम सफलता मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे आत्मसमर्पण से न केवल संगठन की जमीनी ताकत टूटती है, बल्कि अन्य भटके युवाओं को भी मुख्यधारा में लौटने का संदेश मिलता है।
ओडिशा में माओवादी संगठन को बड़ा झटका, 18 वर्षीय LGSM सदस्य ने किया सरेंडर
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