रोल क्लैरिटी या संगठित साजिश? अवैध कबाड़ कारोबार को किसकी सह–तिवारी

कांग्रेस नेता ने उठाया सवाल,बार बार की कार्रवाई के बावजूद लाइसेंस क्यों नहीं हो रहा रद्द
रायगढ़। शहर समेत जिले भर में एक धंधा ऐसा है,जो चोरों का हौसला बढ़ाए हुए है।चोर रातों-रात चोरी का माल पहुंचाते हैं और रात में ही पेमेंट भी हो जाता है।मजे की बात तो यह है कि कारोबार मे बेहिसाब कमाई के बाद भी सरकारी तंत्र कोई दखल नहीं देता।बात कर रहे हैं अवैध तरीके से चल रही कबाड़ दुकानों की।बगैर अनुमति के चल रही इन दुकानों पर सरकारी तंत्र का कोई नियंत्रण नहीं है।
शहर में दर्जनभर से ज्यादा कबाड़ दुकानें हैं,जो लाखों रुपए कमा रही हैं। इन दुकानों में कबाड़ खरीद-बिक्री की न तो रसीद होती है और न ही कोई रिकार्ड।ताजुब्ब इस बात का है कि शहर के कबाड़ कारोबारियों का छापेमारी के बावजूद लाईसेंस रद्द नहीं हो रहा और इसके पीछे की बड़ी वजह चौक चौराहों पर बीजेपी नेताओं के तस्वीरों के साथ कुख्यात कबाड़यों की शुभकामना देते फ्लेक्स और बैनर साफ साफ बता रहे हैं कि आखिर इस अवैध कारोबार को किसकी सह मिल रही है।
उक्त बयान वरिष्ठ नेता व कांंग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता हरेराम तिवारी ने जिले में बेखौफ बढ़ते अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर जारी किये हैं।अपने बयान में हरेराम तिवारी ने हैरानी जाहिर करते हुए कहा कि इस अवैध कबाड़ के व्यवसाय में पुलिस और प्रशासन का कोई रोकटोक नहीं होता। प्रशासनिक ढिलाई के चलते जिले में बाहर से आए लोग इस व्यवसाय में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
लोहे के सामान,घरेलू उपयोग के सामान दलालों के माध्यम से खरीदकर लाखों कमा रहे हैं।पीसीसी प्रवक्ता ने कहा कि दो दिन पहले पुलिस ने 5 करोड़ का कबाड़ जब्त कर अपनी पीठ थपथपाई है किंतु हकीकत यह है कि पुलिस चोर को तो पकड़ लेती है, लेकिन कबाड़ी दुकानदार नए चोरों को पैदा कर देते हैं।हरेराम तिवारी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कबाड़ का कारोबार करने वाले बाल मजदूरी को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
शहर में कई ऐसे इलाके हैं,जहां गरीब वर्ग के बच्चे गली-मोहल्लों में घूमकर कबाड़ जुटाते हैं।दिनभर बोरी लेकर सड़कों और कचरों की खाक छानते रहते हैं।शराब की खाली बोतलें इकट्ठा कर कबाड़ दुकानों में बेचते हैं।कबाड़ियों द्वारा बच्चों को और बढ़ावा दिया जाता है, ताकि इनका व्यवसाय फल-फूल सके।ऐसे बच्चों के मां-बाप भी कबाड़ और कचरा चुनने के लिए भेज देते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि कबाड़ माफिया कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर बखौफ होकर सरकारी संपित्तयों की चोरी कर रहे हैं।
जिस तरह से जिले में अवैध कारोबारी और माफिया एक बार फिर सक्रिय हो रहे है,उसकी खबर पुलिस को नही है,ऐसा नहीं है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसके संरक्षण में अवैध कारोबार पनप रहा है ?आखिर वो कौन सी शक्ति है जिसके संरक्षण में माफिया और उनके गुर्गे कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे है ? ये वो सवाल है,जिसने जिले की कानून-व्यवस्था ही नहीं,बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं।
हरेराम तिवारी ने कहा कि आखिर पुलिस की कार्रवाई में बार बार जब्ती और धरपकड़ की कार्रवाई के बावजूद अवैध कारोबार घटने के बजाय बढ़ क्यों रहा है ? जो शहर में अपराध और जिले के भविष्य को गर्त में ले जाने के माध्यम हैं उनके अवैध कारोबार का लाइसेंस रद्द क्यों नहीं होता ? यह दो नंबर का कारोबार खुलेआम प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है।चोरी का सामान आसानी से बिकने के कारण इलाके में चोरियां भी बढ़ी हैं।पुलिस और प्रशासन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है और बैकडोर से तो कभी खुलेआम भी सत्ता और सफेदपोशों का संरक्षण भी मिल रहा है जो सामाजिक चिंता का विषय भी है।




