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जनजातीय आजीविका और ग्रामीण उद्यम को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम

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राउरकेला, 29 जनवरी। जनजातीय आजीविका और ग्रामीण उद्यम को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला और ओडिशा ग्रामीण विकास एवं विपणन सोसायटी (ओआरएमएएस), सुंदरगढ़ के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है। यह समझौता “लिकर टू लाइफस्टाइल” पहल के तहत महुआ प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना को लेकर हुआ है।


एनआईटी राउरकेला और ओआरएमएएस के बीच एमओयू पर हुए हस्ताक्षर

इस संबंध में गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव और सुंदरगढ़ के जिलाधिकारी डॉ. शुभंकर माहपात्र ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत सुंदरगढ़ जिले के कुआरमुंडा क्षेत्र में महुआ प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जाएगा।


महुआ आधारित गैर-मादक उत्पादों के लिए तकनीकी सहयोग देगा एनआईटी

इस परियोजना में एनआईटी राउरकेला महुआ आधारित गैर-मादक उत्पादों के लिए मशीनरी और उपकरणों के डिजाइन, स्थापना और कमीशनिंग में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य महुआ प्रसंस्करण की दक्षता बढ़ाना, उत्पादों में विविधता लाना और उन्हें बाजार के अनुरूप तैयार करना है।


ओआरएमएएस निभाएगा नोडल एजेंसी की भूमिका, प्रशासन देगा सहयोग

ओआरएमएएस इस परियोजना की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। इसके अंतर्गत फंड जारी करना, हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन और परियोजना की निगरानी शामिल रहेगी। जिला प्रशासन के सहयोग से गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा मानकों और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर भी काम किया जाएगा।


उत्पादक समूहों को मिलेगा प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव

परियोजना के तहत उत्पादक समूहों और कंपनियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा ताकि महुआ मूल्य संवर्धन की आधुनिक तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाया जा सके। साथ ही महुआ आधारित उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार तैयारी के लिए भी सहयोग प्रदान किया जाएगा।


फूड प्रोसेस इंजीनियरिंग विभाग संभालेगा तकनीकी क्रियान्वयन

इस परियोजना का तकनीकी क्रियान्वयन एनआईटी राउरकेला के फूड प्रोसेस इंजीनियरिंग विभाग द्वारा किया जाएगा। परियोजना टीम में विभागाध्यक्ष प्रो. सब्यसाची मिश्रा के साथ प्रो. रामा चंद्र प्रधान और प्रो. मधुरेश द्विवेदी शामिल हैं, जो तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करेंगे।


महुआ प्रसंस्करण से बढ़ेगी आय, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

महुआ मध्य और पूर्वी भारत के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। प्रसंस्करण अवसंरचना और तकनीक आधारित मूल्य संवर्धन से किसानों और वन उत्पाद संग्राहकों की आय बढ़ेगी, कटाई के बाद होने वाले नुकसान कम होंगे और ग्रामीण उत्पादकों को औपचारिक मूल्य श्रृंखला से जोड़ा जा सकेगा।

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