छत्तीसगढ़

फर्जी जनसुनवाई व 27 दिसंबर 2025 की पुलिस बर्बरता के खिलाफ 14 गांव के ग्रामीणों ने थाना तमनार में दर्ज कराई लिखित एफआईआर

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न्यूज धौंराभांठा:- रायगढ़ जिले के थाना तमनार में जिंदल पावर लिमिटेड तमनार द्वारा प्रस्तावित कोल ब्लॉक के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे 14 गांवों के ग्रामीणों ने 27 दिसंबर 2025 को आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस बर्बरता, फर्जी जनसुनवाई और गंभीर आपराधिक घटनाओं के संबंध में थाना तमनार में लिखित एफआईआर दर्ज कराई है।

ग्रामीणों ने थाना प्रभारी तमनार, अनुविभागीय अधिकारी घरघोड़ा, जिंदल पावर लिमिटेड के समस्त प्रबंधन, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं 27 दिसंबर 2025 को सीएचपी चौक लिबरा में पदस्थ पुलिस व राजस्व कर्मियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि वे ग्राम टांगरघाट, आमगांव, तिलाईपारा, बिजना, खुरुसलेंगा, समकेरा, रायपारा, धौराभांठा, झरना, लिबरा, झिंकाबहाल, बागबाड़ी, बुड़िया एवं महलोई के शांतिप्रिय कृषक हैं, जो जिंदल पावर द्वारा प्रस्तावित कोल खदान से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, 8 दिसंबर 2025 को ग्राम धौराभांठा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्कूल मैदान में आयोजित की जाने वाली जनसुनवाई में सुबह 11 बजे तक न तो जिंदल प्रबंधन और न ही प्रशासन का कोई प्रतिनिधि उपस्थित हुआ। बाद में यह जानकारी मिली कि विद्यालय परिसर के पीछे सामुदायिक भवन में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर, प्रभावित ग्रामीणों को बिना सूचना दिए, गोपनीय ढंग से फर्जी जनसुनवाई कराई जा रही है। जब ग्रामीण प्रतिनिधिमंडल एवं स्थानीय विधायक मौके पर पहुंचे तो पुलिस बल द्वारा उन्हें जबरन रोक दिया गया और मात्र 15–20 मिनट में नियोजित लोगों का फर्जी समर्थन दिखाकर जनसुनवाई पूर्ण घोषित कर दी गई।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है और यहां पेसा अधिनियम लागू है। ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का प्रवेश, अधिपत्य या परियोजना स्वीकृत करना कानूनन अपराध है, इसके बावजूद प्रशासन, पुलिस और जिंदल प्रबंधन की मिलीभगत से ग्रामीणों के संवैधानिक अधिकारों का दमन किया गया।

एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि फर्जी जनसुनवाई के विरोध में ग्रामीण 5 दिसंबर 2025 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे और 8 दिसंबर से सीएचपी चौक लिबरा में धरना जारी था। इसी दौरान 27 दिसंबर 2025 को पुलिस संरक्षण में 30–35 कोयला लदे वाहनों को जबरन निकालने का प्रयास किया गया। विरोध करने पर थाना प्रभारी तमनार एवं पुलिस बल द्वारा धरने पर बैठे 35–40 महिला-पुरुषों के साथ मारपीट कर उन्हें घसीटते हुए थाना ले जाया गया।

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इसी दौरान कोयला लदे वाहन क्रमांक OD-16B-5096 द्वारा खुरुसलेंगा के एक बुजुर्ग ग्रामीण को कुचल दिया गया, जिनकी मृत्यु 4 जनवरी 2026 को हो गई। आरोप है कि यह वाहन पुलिस के निर्देश पर जबरन निकाला गया था।

घटना के बाद जिंदल पावर लिमिटेड द्वारा अपने ही नियोजित लोगों से तोड़फोड़ व आगजनी कराई गई, जिससे आंदोलन को बदनाम किया जा सके। साथ ही एक महिला आरक्षक के साथ हुई शर्मनाक घटना की भी ग्रामीणों ने कड़ी निंदा की और स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों का इससे कोई संबंध नहीं है।

ग्रामीणों ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से संबंधित वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्य उनके पास उपलब्ध हैं। उन्होंने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों, पुलिस कर्मियों तथा जिंदल प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल, डीजीपी, छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग, पीएमओ कार्यालय, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को भी प्रेषित की गई है।

14 गांव के ग्रामीणों ने शासन प्रशासन को निष्पक्ष जांच एवं कार्यवाही करने की मांग की है।

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