धान खरीदी में बड़ी गड़बड़ी, 6,470 बोरी धान गायब

सावारावा उपार्जन केंद्र में भौतिक जांच से खुलासा, प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
सूरजपुर, कौशलेन्द्र यादव। जिले की धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर संदेह के घेरे में आ गई है। सावारावा उपार्जन केंद्र में की गई भौतिक जांच के दौरान करीब 6,470 बोरी धान की भारी कमी सामने आई है। कागजी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़े अंतर ने न केवल व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की पोल भी खोल दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश पर एसडीएम भैयाथान की निगरानी में राजस्व एवं सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने उपार्जन केंद्र का औचक भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान जब स्टॉक रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज और उठाव रिकॉर्ड का मिलान किया गया, तो धान की भारी कमी उजागर हुई। इस दौरान तहसीलदार भैयाथान, सहकारी बैंक प्रबंधक ओड़गी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी मौजूद रहे।
सूत्रों का कहना है कि धान उठाव में लगातार हो रही सुस्ती, कमजोर मॉनिटरिंग और समय पर सत्यापन न होना इस अनियमितता की प्रमुख वजह मानी जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान आखिर कब और कैसे गायब हुआ, और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी।
मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच तेज करने और विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कही है। दोषी पाए जाने पर वसूली, विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है। हालांकि, पूर्व के अनुभवों को देखते हुए लोग इस कार्रवाई को लेकर संशय में हैं।
इधर, सावारावा केंद्र की इस घटना ने जिले के अन्य धान खरीदी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अन्य केंद्रों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां दबे रूप में मौजूद हैं? क्या वहां भी सघन भौतिक सत्यापन कराया जाएगा? यह प्रश्न अब किसानों और आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
जिला प्रशासन के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में 2,34,245 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। कुल 41,977 टोकन जारी हुए हैं, जिनमें से 22,756 मोबाइल ऐप के माध्यम से दिए गए। 11,415 किसानों ने 495.41 हेक्टेयर रकबा समर्पित किया है। वहीं अवैध धान पर कार्रवाई करते हुए 64 मामलों में करीब 4,750 क्विंटल धान जब्त किए जाने का दावा किया गया है।
कुल मिलाकर, सावारावा उपार्जन केंद्र में सामने आई यह गड़बड़ी धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में वास्तविक सख्ती दिखाता है या फिर यह मामला भी जांच फाइलों में दबकर रह जाता है। किसानों की मेहनत और भरोसे की रक्षा के लिए तत्काल, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई ही समय की मांग है।




