
रायगढ़@खबर सार :- धनागार गांव में रेत माफिया ने रेत को हथियार बनाकर ऐसा साम्राज्य खड़ा किया है कि शासन-प्रशासन के सारे दावे हवा में उड़ गए। ताजा खबर है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पीछे मैदान में अवैध रेत का भंडारण अब ट्रैक्टरों पर लोड हो रहा है, और खनिज विभाग की आंखें मूंदी पड़ी हैं। माफिया बेखौफ, ट्रैक्टर सरपट, और प्रशासन खामोश—यह है रायगढ़ की रेत की काली कहानी!
सूत्र: आज भी लोडिंग के दौरान एक ट्रैक्टर देखा गया, मगर ड्राइवर ने मालिक को फोन घुमाया और गाड़ी समेत फुर्र! खनिज विभाग की टीम? वो तो शायद फोन पर ‘बिजी’ है या ‘नॉट रीचेबल’!
रायगढ़ में रेत भंडारण का लाइसेंस सिर्फ तीन लोगों के पास, लेकिन मांग का आलम ये कि माफिया अवैध खनन और बिक्री से मोटी कमाई कर रहे हैं। मानसून में रेत की कीमतें आसमान छू रही हैं, और माफिया इस मौके को सोने की खान बना रहा है। शासन को राजस्व का चूना, जनता की जेब पर डाका, और माफिया की तिजोरी भर रही है। सवाल ये कि क्या माफिया को ऊपर से छतरी मिली है, या खनिज विभाग की चुप्पी ने उनके हौसले बुलंद किए हैं?
जलते सवाल, ठंडा प्रशासन:
– धनागार में ट्रैक्टरों पर रेत की लोडिंग कब रुकेगी?
– खनिज विभाग कब जागेगा—जब सारी रेत बिक जाएगी?
– क्या सत्ता का संरक्षण माफिया की ढाल बना हुआ है?
जिला कलेक्टर को अवैध भंडारण पर नकेल कसने का जिम्मा है, लेकिन धनागार का ये खुला खेल सारे दावों को रेत की तरह बिखेर रहा है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि माफिया का नेटवर्क इतना पक्का है कि वो हर बार बच निकलता है। खनिज अधिकारियों का फोन न उठना अब कोई नई बात नहीं।
जनता का हुंकार : रेत माफिया का ये बेलगाम खेल कब रुकेगा? क्या रायगढ़ में कानून सिर्फ कागजों पर है? अगर प्रशासन अब भी सोता रहा, तो धनागार का रेत माफिया और बुलंदी छू लेगा। खनिज विभाग, अब तो जागो—या फिर माफिया को खुला लाइसेंस दे दो!




