रायगढ़

धरमजयगढ़ के जंगलों में खनन का नया अध्याय — शेरबंद कोल ब्लॉक बना सुर्खियों का केंद्र

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प्रतीक मल्लिक ✍️

CMPDIL की स्वीकृति के बाद शुरू हुई भूमि अधिग्रहण की तैयारी

रायगढ़, 13 नवंबर। धरमजयगढ़ के घने जंगलों के बीच अब Sherbandh Coal Block को लेकर नई हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार के कोल मंत्रालय ने इस ब्लॉक को नीलकंठ कोल माइनिंग प्रा. लि. को आवंटित किया है। यह आवंटन कमर्शियल माइनिंग परियोजना के तहत किया गया है।
कंपनी ने खनन कार्य प्रारंभ करने के लिए वर्ष 2029 की डेडलाइन तय की है। इस बीच CMPDIL से भूगर्भीय रिपोर्ट की स्वीकृति मिलने के बाद अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है।

लेमरु एलीफेंट रिजर्व के पास खनन से पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा

Sherbandh Coal Block का क्षेत्र धरमजयगढ़ तहसील के अंतर्गत आता है, जो लेमरु एलीफेंट रिजर्व से मात्र पाँच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह इलाका घने जंगलों और वन्यजीवों की गतिविधियों के लिए जाना जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि इस क्षेत्र में ओपन-कास्ट कोयला खनन हुआ, तो इससे जंगलों और वन्यजीवों की पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हाथियों की आवाजाही वाले इस इलाके में खनन से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका है।

संरक्षित बिरहोर समुदाय पर खनन का सीधा असर

Sherbandh Coal Block के दायरे में आने वाले गांवों में संरक्षित आदिवासी बिरहोर समुदाय की आबादी निवास करती है। इनमे खलबोस, क्रीडीह और राखनबोरा जैसे गांव शामिल हैं, जहां बिरहोर बाहुल्य बस्तियाँ हैं। जानकारी के अनुसार, कंपनी द्वारा किए गए सर्वे में यह सामने आया है कि जिस क्षेत्र में खनन की योजना है, वहां पहले से ही DMF फंड के तहत लगभग 5 करोड़ रुपये विकास कार्यों में खर्च किए जा चुके हैं। इनमें मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट, पशुधन विकास केंद्र, गाय-बकरी पालन शेड और ट्रेनिंग सेंटर जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।

550 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की योजना, जिसमें 170 हेक्टेयर वन भूमि

Sherbandh Coal Block परियोजना के लिए करीब 550 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का अनुमान है, जिसमें लगभग 170 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खनन से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण और भूमि क्षरण न केवल जंगलों को प्रभावित करेगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण जीवन पर भी असर डालेगा।

कमर्शियल माइनिंग में नीलकंठ कंपनी की नई पारी

नीलकंठ कोल माइनिंग प्रा. लि. अब तक मुख्य रूप से MDO (Mine Developer and Operator) के रूप में कार्य कर रही थी। लेकिन Sherbandh Coal Block के साथ कंपनी अब सीधे कमर्शियल माइनिंग सेक्टर में प्रवेश कर रही है। यह परियोजना कंपनी के लिए एक बड़ा औद्योगिक कदम मानी जा रही है, जो क्षेत्रीय रोजगार और निवेश के नए अवसर भी ला सकती है।

विकास बनाम पर्यावरण — धरमजयगढ़ में दोराहे पर खड़ी तस्वीर

धरमजयगढ़ के ग्रामीणों में जहां कुछ लोग इसे विकास का अवसर मान रहे हैं, वहीं कई लोग पर्यावरण और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि सरकार को इस परियोजना के पहले पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) और सामाजिक संतुलन योजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि विकास के साथ प्रकृति का संतुलन भी कायम रहे।

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