कवि साहिल की कविता में सामाजिक चेतना और इंकलाब का आह्वान

सारंगढ़ । साहित्यकार एवं पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे “साहिल” की नवीन कविता “मेरे मन…” सामाजिक सरोकार, जनसंघर्ष और उम्मीद के संदेश के साथ सामने आई है। यह कविता केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय, जुल्म और अंधेरगर्दी के खिलाफ आवाज बनने का आह्वान करती है।

कविता में उल्लास, विश्वास और नई सुबह की उम्मीद को केंद्र में रखते हुए कमजोर और वंचित वर्ग के साथ खड़े होने की बात कही गई है। कवि ने तन्हाई, भय और चुप्पी को तोड़ते हुए प्रेम, साहस और संघर्ष की राह चुनने का संदेश दिया है। संसद से लेकर सड़क तक, अन्याय के खिलाफ बोलने और मजलूमों की आवाज बनने की प्रेरणा कविता की पंक्तियों में साफ झलकती है।

कवि साहिल ने अपनी रचना में यह भी रेखांकित किया है कि जुल्म चाहे जितना हो, उससे लड़ने का हौसला और चेतना जरूरी है। आंधी-तूफानों से जूझने, अंधकार के बीच उजाले का इतिहास लिखने और बचपन में पले स्वाभिमान को संजोकर रखने की बात कविता को विशेष बनाती है।
सरल शब्दों में गहरी बात कहने वाली यह कविता पाठकों को सोचने और समाज में परिवर्तन के लिए सक्रिय होने का संदेश देती है। साहित्य प्रेमियों के बीच यह रचना सामाजिक बदलाव और इंकलाब की भावना को मजबूती देने वाली मानी जा रही है।




