Uncategorized

ठेकेदार-अधिकारियों की मिलीभगत से पाड़ाहरदी में नल-जल योजना फेल

Advertisement



जैजैपुर-सक्ती। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना जहां हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना दिखा रही है, वहीं सक्ती जिले के जैजैपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाड़ाहरदी में यह योजना पीएचई विभाग सक्ती और ठेकेदार की लापरवाही व मिलीभगत की भेंट चढ़ चुकी है। हालात यह हैं कि योजना शुरू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक ग्रामीणों को नल से पानी नसीब नहीं हो पाया है। ग्रामीणों के माने तो जब गांव में पानी टंकी और पाइपलाइन बिछाने

का काम शुरू हुआ था, तब उम्मीद जगी थी कि अब सूखे गांव को राहत मिलेगी। ठेकेदार ने गांव की गलियों में खुदाई कर पाइपलाइन बिछाई और टंकी निर्माण भी शुरू किया, लेकिन काम अधूरा छोड़ ठेकेदार अचानक लापता हो गया। आज स्थिति यह है कि न तो टंकी का निर्माण पूरा है और न ही पानी सप्लाई की कोई व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश पनपने लगा है।

अधूरे काम से गांव का विकास ठप
ग्राम पंचायत पाड़ाहरदी के सरपंच अभिषेक भारद्वाज ने बताया कि ठेकेदार की मनमानी और पीएचई विभाग की उदासीनता के कारण पंचायत के अन्य विकास कार्य भी ठप पड़ गए हैं। पाइपलाइन बिछाने के नाम पर गलियों को खोद दिया गया, लेकिन मरम्मत नहीं की गई। इसके चलते गांव में सीसी रोड निर्माण तक शुरू नहीं हो सका। बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल व गड्ढों से ग्रामीणों को गुजरना पड़ रहा है।

पानी से पहले टूटने लगे नल-जल स्टैंड
नल-जल योजना के तहत घर-घर बनाए गए स्टैंड भी घटिया क्वालिटी के मटेरियल से तैयार किए गए हैं। स्थिति यह है कि पानी चालू होने से पहले ही कई स्टैंड टूटने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया सीमेंट और गिट्टी का उपयोग कर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई, लेकिन पीएचई विभाग के किसी भी अधिकारी ने स्थल निरीक्षण करना जरूरी नहीं समझा।

मरम्मत के नाम पर भी लीपापोती
नियमों के अनुसार पाइपलाइन बिछाने के बाद सीमेंट-बजरी से मरम्मत की जानी चाहिए थी, लेकिन ठेकेदार ने इसे जानबूझकर टाल दिया। आरोप है कि मरम्मत की राशि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से डकार ली गई, जबकि गांव की सडक़ों को बदहाल छोड़ दिया गया।

शिकायतों के बाद भी विभाग मौन
ग्रामीणों और सरपंच द्वारा कई बार पीएचई विभाग सक्ती और ठेकेदार को अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ जाहिर होता है कि विभाग ने ठेका देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। न इंजीनियर निरीक्षण करने पहुंचे और न ही ठेकेदार पर कोई दबाव बनाया गया। यह मामला सिर्फ पाड़ाहरदी का नहीं, बल्कि जैजैपुर क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना की असलियत को उजागर करता है, जहां कागजों में योजना पूरी और जमीनी हकीकत में ग्रामीण आज भी पानी को तरस रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button