
धरमजयगढ़ में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया गया अटल बिहारी वाजपेई का जन्मदिवस
धरमजयगढ़ (रायगढ़)।
भारतीय राजनीति के दैदीप्यमान सूर्य, छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के शिल्पकार और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की 110वीं जयंती के अवसर पर धरमजयगढ़ में श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया ने नगर पंचायत द्वारा निर्मित अटल चौक स्थित अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा पर दल-बल के साथ माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
अटल जी के विचार आज भी प्रासंगिक
इस अवसर पर वक्ताओं ने अटल बिहारी वाजपेई के राजनीतिक जीवन, वैचारिक दृढ़ता और राष्ट्रधर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद किया। बताया गया कि वर्ष 1979 में सरकार गिरने के बाद अटल जी ने नई राजनीतिक धारा के गठन का संकेत दिया और 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई। अटल जी का स्पष्ट मत था कि पद जाना कोई प्रश्न नहीं, लेकिन राष्ट्र और विचारधारा से समझौता नहीं होना चाहिए।
राजनीति के साथ कवि हृदय का व्यक्तित्व
वक्ताओं ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई केवल कुशल राजनेता ही नहीं, बल्कि संवेदनशील कवि भी थे। उनकी रचनाओं में आम आदमी का संघर्ष, भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों की गहरी छाप दिखाई देती है। वे राजनीति में परिवार के बुजुर्ग की तरह सभी के लिए स्नेहिल और आत्मीय थे—चाहे वरिष्ठ नेता हों या साधारण कार्यकर्ता।
विपक्ष में रहकर भी राष्ट्रहित की पैरवी
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि संसद में विपक्ष में रहते हुए भी अटल जी ने सत्ता पक्ष को राष्ट्रधर्म का पालन करने की नसीहत दी। यही कारण रहा कि तत्कालीन सत्ता पक्ष और वर्तमान विपक्ष—दोनों ही उन्हें समान सम्मान देते रहे।
खेल महोत्सव के बाद अटल चौक पहुंचे सांसद
सांसद राधेश्याम राठिया खेल महोत्सव के उद्घाटन के पश्चात अटल परिसर पहुंचे और अटल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जयंती कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर नगर पंचायत के जनप्रतिनिधि, भाजपा मंडल व समिति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, जिला भाजपा मंडल उपाध्यक्ष गोकुल नारायण यादव, नगर पंचायत के सीएमओ, इंजीनियर एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन अटल बिहारी वाजपेई के विचारों को आत्मसात करने और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ किया गया।




