विक्षिप्त महिला से दुष्कर्म के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने सुनाया फैसला
पेंड्रा । मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी परमेेश्वरदीन श्रीवास को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। मरवाही थानाक्षेत्र ग्राम बंशीलाल के सरपंच चैनसिंह सरोता की दुकान के बरामदे में रह रही एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला के साथ 24 अगस्त 2024 की रात लगभग 10.30 बजे यह घटना हुई।
जिसमें आरोपी परमेेश्वरदीन श्रीवास ने मौके का फायदा उठाकर महिला को जमीन पर पटककर जबरन बलात्कार किया। महिला के शोर मचाने पर आवाज सुनकर स्थानीय निवासी ने अपने मोबाइल से सरपंच चैनसिंह सरोता के बेटे बबलू उर्फ हरवंश सरोता को सूचना दी। सूचना मिलते ही सरपंच का परिवार और गांव के अन्य लोग मौके पर पहुँचे, तो आरोपी को पकड़कर पूछताछ की गई, जहां उसने गलती मानते हुए माफी मांगकर दो बार पैर पकड़कर विनती की।
पीड़िता के साथ हुई ज्यादती की लिखित शिकायत के आधार पर थाना मरवाही ने 25 अगस्त 2024 को आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 196/2024 दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की धारा 64(1) के तहत मामला कायम किया। पुलिस ने घटनास्थल से आरोपित द्वारा फेंके गए अंदरूनी कपड़े, लोअर पेंट व अन्य कपड़ों को जब्त कर साक्ष्य के रूप में अदालत के सामने पेश किया। गवाहों के बयान, पीड़िता की मानसिक स्थिति और घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध होता है और आरोपी को दोषी करार दिया।
न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने माना कि आरोपी ने मानसिक रूप से अस्वस्थ पीड़िता के साथ उसकी इच्छा और सहमति के बिना बलात्कार कर अत्यंत जघन्य प्रकृति का अपराध किया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(c) के तहत आरोपी को आजीवन कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
जुर्माना न चुकाने पर तीन माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास का प्रावधान रखा गया है। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने किया। फैसले में न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में न्यूनतम सजा देना न्याय की पूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं होता, इसलिए कड़ी सजा देकर समाज में कड़ा संदेश देने की आवश्यकता है।




