छत्तीसगढ़

अंबिकापुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी संपन्न, देशभर से 250 से अधिक शोधकर्ताओं ने की सहभागिता

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राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर के शोध एवं अध्ययन केंद्र, भूगोल विभाग तथा छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद के संयुक्त तत्वावधान में “भारत में क्षेत्रीय विकास: मुद्दे एवं चुनौतियां” विषय पर 21 एवं 22 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।



इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में छत्तीसगढ़ सहित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, मिजोरम और बिहार से आए 250 से अधिक भूगोल प्राध्यापकों, शोधकर्ताओं एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया। अवसर पर प्रकाशित ‘संक्षेपिका’ एवं ‘स्मारिका’ में कुल 173 शोध-पत्रों के सारांशों का प्रकाशन किया गया। दो दिनों में आयोजित आठ तकनीकी सत्रों में देश के ख्यातनाम भूगोलविदों के आमंत्रित व्याख्यानों के साथ 32 शोध-पत्रों का वाचन हुआ।

यंग जियोग्राफर अवार्ड में युवा शोधकर्ताओं ने दिखाई प्रतिभा

इस संगोष्ठी की विशेषता यह रही कि 35 वर्ष से कम उम्र के शोधार्थियों के लिए अलग प्रतियोगिता के रूप में शोध-पत्र प्रस्तुति आयोजित की गई। ‘यंग जियोग्राफर अवार्ड’ के लिए आठ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें तीन उत्कृष्ट शोध-पत्रों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया—



1. अजीत कुमार शांते, रायपुर


2. शमलेश पोटाई, कोंडागांव


3. असुंता खलखो, दुर्ग

विशेष रूप से, भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल सिन्हा एवं उनकी धर्मपत्नी उमा सिन्हा ने अपने स्वर्गीय माता-पिता की स्मृति में तीनों विजेताओं को नकद राशि प्रदान कर सम्मान बढ़ाया।

पोस्टर प्रतियोगिता में छात्रों का शानदार प्रदर्शन

सस्टेनेबल डेवलपमेंट एवं नगरीय विकास विषय पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में 17 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें से तीन उत्कृष्ट पोस्टरों के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।



समापन सत्र में विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण विचार

समापन सत्र के मुख्य अतिथि, छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. टी. एल. वर्मा ने “विकसित भारत 2047” के रोडमैप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षेत्रीय विकास में सामाजिक-आर्थिक, भौगोलिक एवं राजनीतिक कारकों की सामंजस्यपूर्ण भूमिका अत्यंत आवश्यक है।

विशिष्ट अतिथि, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. एस. पी. त्रिपाठी ने संसाधनों के उपयोग एवं संरक्षण को विकास प्रक्रिया की प्रमुख आवश्यकता बताया।



मिजोरम केंद्रीय विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. वी. पी. सती ने शोध में आंकड़ा संकलन, पर्यवेक्षण एवं विश्लेषण की वैज्ञानिक पद्धतियों पर विस्तृत जानकारी दी। वे हिमालयी क्षेत्रों में सूक्ष्म अनुसंधान के दीर्घ अनुभव के लिए विख्यात हैं।

वरिष्ठ शिक्षकों एवं प्राध्यापकों की रही गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में महाविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र वर्मा, वरिष्ठ भूगोलवेत्ता जे. पी. शिवहरे, छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष प्रो. डी. डी. कश्यप, प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल सिन्हा सहित महाविद्यालय एवं सरगुजा संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापक तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ प्राध्यापक उपस्थित रहे।

समापन सत्र का संचालन इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अजय पाल सिंह ने किया।

आभार व सहयोग

संगोष्ठी की संयोजक श्रीमती दीपिका स्वर्णकार ने कार्यक्रम की सफलता के लिए महाविद्यालय परिवार एवं देशभर से आए प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन सचिव ओमकार कुशवाहा, डॉ. राजीब जाना तथा स्नातकोत्तर भूगोल छात्रों की भूमिका की विशेष सराहना की गई।

ज्ञातव्य है कि संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु महाविद्यालय स्वशासी वित्त योजना अनुदान के साथ-साथ छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।

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