छत्तीसगढ़

शराब दुकानों में MRP की धज्जियां, गोवा क्वार्टर 120 की जगह 140 में; आबकारी विभाग मौन, सिंडिकेट का खेल

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बस्तर@खबर सार : नियम कहता है कि किसी भी वस्तु को MRP से अधिक नहीं बेचा जा सकता, लेकिन बस्तर की शासकीय शराब दुकानों में यह कानून कागजों तक सीमित है। विदेशी शराब ‘गोवा’ की क्वार्टर, जिसकी MRP 120 रुपये है, खुले आम 140 रुपये में ठगी जा रही है। शराब प्रेमी 10 से 100 रुपये तक ओवररेट चुकाने को मजबूर हैं। आबकारी विभाग की उदासीनता और प्लेसमेंट कंपनी ‘रक्षक’ के सेल्समैनों की मनमानी ने शराब की काली सिंडिकेट को पनपने दिया है।

बस्तर सर्किल की जिम्मेदारी रक्षक प्लेसमेंट कंपनी के पास है। सूत्रों के अनुसार कंपनी के कर्मचारी रनधीर सिंह और कथित मास्टरमाइंड अहिंदर उड़िया (जिन्हें बलौदाबाजार में लापरवाही के चलते हटाया गया था) अब बस्तर में धड़ल्ले से ओवररेटिंग का खेल चला रहे हैं। सेल्समैनों पर हर बोतल पर अतिरिक्त वसूली का दबाव है।

कितना ओवररेट?
– पौवा: 10–30 रुपये अतिरिक्त 
– हाफ: 30–50 रुपये अतिरिक्त 
– फुल बोतल: 50–100 रुपये अतिरिक्त 

ग्राहक जब छपी कीमत दिखाते हैं, तो सेल्समैन स्टिकर उखाड़कर या प्रिंट रेट मिटाकर बहस शुरू कर देते हैं। कई दुकानों पर अभद्रता और धमकी आम है।

शराब प्रेमियों का गुस्सा

एक ग्राहक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “गोवा 120 की है, लेकिन 140 के नीचे नहीं मिलती। शिकायत करो तो कहते हैं – ‘जाओ, कहीं और से ले आओ।’ आबकारी विभाग आंखें मूंदे बैठा है।”

सिंडिकेट का पुराना चेहरा

अहिंदर उड़िया पर बलौदाबाजार में सुमित प्लेसमेंट कंपनी ने कार्रवाई की थी। अब वही बस्तर में सक्रिय है। ग्रामीण बताते हैं कि सेल्समैनों को टारगेट दिया जाता है – “ओवररेट से ही कमीशन बनेगा।”

आबकारी विभाग की खामोशी

जिले के आबकारी अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो कोई जवाब नहीं मिला। क्या सेल्स मेन होगा सस्पेंड?

स्थानीय समाजसेवी ने कहा, “यह सिर्फ ठगी नहीं, स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। ओवररेटिंग से अवैध शराब को बढ़ावा मिल रहा है।” 

शराब प्रेमियों ने कलेक्टर और आबकारी आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग की है। अब देखना यह है कि MRP का सम्मान कब बहाल होगा या सिंडिकेट का खेल यूँ ही चलता रहेगा।

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