छत्तीसगढ़

छोटानागरा में आयोजित सारंडा सुरक्षा समिति द्वारा नक्सल हटाओ कार्यक्रम,में ग्रामीणों ने बनाई दूरी. कार्यक्रम में नहीं पहुंचे कोई भी मुंडा,मानकी

मनोहरपुर : पश्चिम सिंहभूम जिला अंतर्गत सुदूरवर्ती सारंडा के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र छोटानागरा के साप्ताहिक हाट-बाजार में शनिवार को सारंडा सुरक्षा समिति नामक संगठन द्वारा नक्सल हटाओ-सारंडा को बचाओ नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

चुंकी इस कार्यक्रम में ना तो सारंडा के किसी ग्रामीण की मौजूदगी रही, और ना ही मानकी-मुंडा या बुद्धिजीवी वर्ग का कोई सदस्य इसमें हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने पूरी तरह से अपने आपको अलग-थलग रखा. स्पष्ट है कि इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में संशय का वातावरण बना हुआ है.

विदित हो की दो दिन पूर्व सारंडा सुरक्षा समिति नामक संगठन द्वारा इस आयोजन को लेकर प्रचारित किया गया था कि इस कार्यक्रम में किरीबुरु, गंगदा, रोवाम, मनोहरपुर,बलिबा,सोनापी,
मरांगपोंगा समेत दर्जन भर गांवो के सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण हिस्सा लेने वाले है. किंतु आज इस कार्यक्रम स्थल पर एक भी ग्रामीण नजर नहीं आया.

और इस कार्यक्रम में सारंडा क्षेत्र के मानकी-मुंडाओं ने भी हिस्सा नहीं लिया. लिहाजा कुछ ग्रामीण बच्चे भोजन करने जरूर पहुंचे थे. चुंकी आज साप्ताहिक हाट होने के बावजूद भी आम दिनों की तुलना में भी लोगों की उपस्थिति बेहद कम रही. इससे स्पष्ट होता है कि आयोजन को लेकर ग्रामीणों में संशय बरकरार है.

नक़्सलवाद के विरोध में नुक्कड़ नाटक का आयोजन:-
जिला सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा इस कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक टीम के माध्यम से नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया था. तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को नक्सलवाद के खिलाफ जागरूक करने का प्रयास भी किया गया. किंतु इस प्रयास का भी ग्रामीणों का कोई समर्थन नहीं मिला.

आयोजन स्थल पर टेंट लगाने से,स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने भी जताई नाराजगी:-
इस आयोजन को लेकर सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम ने कहा कि उन्हें इस संगठन के बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही कार्यक्रम को लेकर उन्हें कोई भी जानकारी है. इसे लेकर उनसे किसी से संपर्क भी नहीं हुआ है.

कहा कि इस आयोजन को लेकर जब उनकी जमीन पर टेंट लगाया गया तो उन्होंने छोटानागरा पुलिस से उसे हटवाने का अनुरोध किया था. किंतु वहां से टेंट नहीं हटाया गया. उनका कहना है कि यदि यह कार्यक्रम पुलिस या प्रशासन द्वारा आयोजित किया गया था, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए थी, चुंकी यह मामला लोगों की जान-माल से जुड़ा हुआ है.

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