छत्तीसगढ़

धान खरीदी में करोड़ों का खेल उजागर, जांच के बाद भी जिम्मेदारों पर मेहरबानी!

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संयुक्त जांच में चार केंद्रों पर भारी कमी, कई और केंद्र संदेह के घेरे में

प्रशासनिक संरक्षण के आरोप, किसानों का भरोसा डगमगाया

सूरजपुर । जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर जिला प्रशासन के दावों की हकीकत अब खुद उसकी जांच में ही उजागर होने लगी है। लगभग एक माह की लंबी खामोशी के बाद सक्रिय हुई प्रशासन की संयुक्त जांच टीम ने जब भौतिक सत्यापन किया, तो महज चार धान खरीदी केंद्रों पर ही करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कमी आधिकारिक रूप से सामने आ गई। यह खुलासा न सिर्फ प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पूरे धान खरीदी तंत्र को कठघरे में खड़ा कर देता है।

सूत्रों की मानें तो प्रेमनगर विकासखंड के उमेश्वरपुर और चंदनगर धान खरीदी केंद्रों में भी भारी मात्रा में धान गायब होने की जानकारी है, लेकिन इन केंद्रों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह सवाल और गहराता जा रहा है कि क्या जांच की आंच कुछ चुनिंदा केंद्रों तक ही सीमित रखी जा रही है और बाकी मामलों को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है?

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बावजूद कागजी धान खरीदी में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर ठोस कार्रवाई से प्रशासन बचता नजर आ रहा है। उल्टे सहकारी समितियों पर ही सारा ठीकरा फोड़ा जा रहा है, जिससे साफ संदेश जा रहा है कि असली जिम्मेदारों को संरक्षण दिया जा रहा है। इससे किसानों और आमजन के बीच प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश पनप रहा है।

इसी बीच आम आदमी पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी आशिष कुशवाहा ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सोनपुर सहकारी समिति के प्रबंधक सतेश्वर साहू के खिलाफ गंभीर आरोपों की शिकायत दर्ज कराई है। ज्ञापन में किसानों से दुर्व्यवहार, खातों में फर्जी ऋण दर्ज करने और धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर एक और बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

ज्ञापन के अनुसार ग्राम सोनपुर सहित आसपास के किसानों के साथ समिति प्रबंधक द्वारा लगातार अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। कई किसानों के खातों में ऐसे ऋण दर्ज हैं, जिनका भुगतान वे पहले ही कर चुके हैं, फिर भी उन्हें जबरन बकायादार बताया जा रहा है। इससे किसान मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। आरोप है कि प्रबंधक अक्सर कार्यालय से नदारद रहते हैं और राजनीतिक पहुंच का हवाला देकर किसानों को समिति के लाभ से वंचित करने की धमकी देते हैं।

इन अनियमितताओं का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। किसान न तो नया ऋण ले पा रहे हैं और न ही शासकीय योजनाओं का लाभ उन्हें मिल पा रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से किसानों में गहरी निराशा और आक्रोश व्याप्त है। ज्ञापन सौंपने के बाद उम्मीद जताई गई है कि जिला प्रशासन अब लीपापोती छोड़कर दोषियों पर कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई करेगा, ताकि धान खरीदी व्यवस्था पर किसानों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें
सोनपुर सहकारी समिति के प्रबंधक को तत्काल हटाया जाए।
किसानों के खातों में दर्ज फर्जी एवं पहले से चुकाए जा चुके ऋणों को तुरंत सुधारा जाए। भविष्य में किसानों के साथ किसी भी प्रकार की प्रताड़ना न हो, इसके लिए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।

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