रायगढ़ की सड़कों पर अराजकता का राज: ट्रैफिक नियमों की उड़ रही धज्जियां, नाबालिग चालकों और ऑटो वालों की मनमानी से जनता परेशान

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रायगढ़@खबर सार :- एक समय था जब रायगढ़ की सड़कें व्यवस्थित और सुरक्षित मानी जाती थीं, लेकिन अब शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। सड़कों पर अव्यवस्था का आलम इस कदर है कि न तो ट्रैफिक सिग्नल का कोई मतलब रह गया है और न ही नियमों का पालन करने की किसी को फिक्र। नाबालिग चालकों की लापरवाही, बिना लाइसेंस के वाहन दौड़ाने की होड़ और ऑटो चालकों की मनमानी ने शहरवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। ट्रैफिक पुलिस की निष्क्रियता और प्रशासन की उदासीनता ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।

शहर की मुख्य सड़कों पर हर दिन नाबालिगों को बाइक और स्कूटी पर स्टंट और तेज रफ्तार भागते देखा जा सकता है। बिना लाइसेंस और बिना किसी डर के ये नाबालिग तेज रफ्तार में वाहन दौड़ा रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय ने गुस्से में कहा, “ट्रैफिक पुलिस को शायद इन नाबालिगों की हरकतें दिखाई नहीं देतीं। कोई चेकिंग नहीं, कोई कार्रवाई नहीं। अगर यही हाल रहा तो बड़ा हादसा होना तय है।”

वहीं, ऑटो चालकों की मनमानी ने भी आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। अधिकांश ऑटो चालक बिना निर्धारित वर्दी के वाहन चला रहे हैं। न तो उनके पास कोई पहचान पत्र होता है और न ही किराए की कोई तय दर। यात्री (नाम न बताने की शर्त) में बताया, “कुछ ऑटो वाले मनमाना किराया मांगता है। 20 रुपये की दूरी के लिए 30-40 रुपये वसूल लिए जाते हैं। शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।” ऑटो स्टैंड्स पर अव्यवस्था का माहौल है, जहां बिना किसी कतार के ऑटो चालक यात्रियों को लुभाने के लिए आपस में होड़ लगाते हैं, जिससे जाम की स्थिति बन रही है।

ट्रैफिक सिग्नल भी शहर में सिर्फ दिखावे के लिए रह गए हैं। कई चौराहों पर सिग्नल खराब पड़े हैं, और जहां सिग्नल काम कर रहे हैं, वहां भी चालक उन्हें अनदेखा कर रहे हैं। एक स्थानीय दुकानदार ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “लाल बत्ती यहाँ सजावट का सामान बन चुकी है। कोई रुकता ही नहीं।” ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति ने नियम तोड़ने वालों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं।

शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय-समय पर अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन ये अभियान सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रहते हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता, ने सवाल उठाया, “क्या प्रशासन को सिर्फ जुर्माना वसूलने से मतलब है? ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ठोस नीति और सख्ती की जरूरत है। नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकने के लिए स्कूलों और अभिभावकों को भी जागरूक करना होगा।”

लेकिन सवाल यह है कि क्या ये आश्वासन शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर ला पाएंगे? शहरवासियों की मांग है कि प्रशासन न केवल नियमों का सख्ती से पालन कराए, बल्कि जागरूकता अभियान भी चलाए ताकि लोग ट्रैफिक नियमों का महत्व समझें। जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, रायगढ़ की सड़कें अराजकता का शिकार बनी रहेंगी।

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