रायगढ़

शातिर बाइक चोर विकेश दास महंत गिरफ्तार, 25 बाइक चोरी मामले में न्यायिक रिमांड

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रायगढ़, 11 फरवरी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के निर्देशन में संगठित वाहन चोर गिरोह के मुख्य आरोपी एवं शातिर बाइक चोर विकेश दास महंत (27 वर्ष), पिता गनपत दास महंत, निवासी सांगीतराई डीपापारा जूटमिल को साइबर थाना एवं पूंजीपथरा पुलिस की संयुक्त टीम ने 9 फरवरी की शाम गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

कई थानों में 25 बाइक चोरी में संलिप्तता

आरोपी की संलिप्तता पूंजीपथरा, तमनार, घरघोड़ा और रायगढ़ बाजार क्षेत्र में हुई लगभग 25 बाइक चोरी की घटनाओं में सामने आई है। वह पूर्व में भी बाइक चोरी के मामले में जेल जा चुका था। जेल से रिहा होने के बाद पुलिस उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही थी।

9 फरवरी को पूंजीपथरा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि के दौरान संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। आरोपी को थाना पूंजीपथरा के अपराध क्रमांक 05/2026, 09/2026 एवं 10/2026 में धारा 303(2) और 112(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

संगठित गिरोह का पहले हो चुका है खुलासा

1 फरवरी को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस वार्ता में एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने एक संगठित बाइक चोर गिरोह का खुलासा किया था। इस कार्रवाई में गिरोह के मुख्य आरोपी मुकेश चौहान सहित कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने आरोपियों से:

25 चोरी की बाइक

एक एप्पल लैपटॉप

एक कलर प्रिंटर
जब्त किए थे।


फर्जी दस्तावेज तैयार कर बाजार में खपाई जाती थीं बाइकें

जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह चोरी की बाइक के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें बाजार में बेचता था।

चेचिस नंबर के आधार पर वास्तविक मालिक की जानकारी निकाली जाती थी।

लोक सेवा केंद्र के माध्यम से फर्जी पंजीयन और आरसी तैयार की जाती थी।

पीबीसी कार्ड में हेरफेर कर ट्रांसफर कार्ड पर कूटरचित हस्ताक्षर किए जाते थे।


प्रकरण में धारा 112(2) के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धारा 317(2) एवं 336(3) भारतीय न्याय संहिता जोड़ी गई है।

एसएसपी का बयान

एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने कहा कि संगठित वाहन चोरी गिरोहों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की सूचना तत्काल पुलिस को दें, जिससे अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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