250 जोड़ों का सामूहिक विवाह या अव्यवस्था का आयोजन?

जमीन पर बैठे परिजन, मंच पर सुविधाएं—सूरजपुर में दावों और हकीकत के बीच बड़ा फासला
सूरजपुर कौशलेन्द्र यादव । मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत जिला प्रशासन द्वारा 250 जोड़ों के सामूहिक विवाह को “सफल आयोजन” बताया जा रहा है, लेकिन आयोजन स्थल से सामने आई तस्वीरें और लोगों की शिकायतें इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। अग्रसेन भवन में आयोजित यह कार्यक्रम विवाह की खुशी से अधिक अव्यवस्था और असुविधाओं के कारण चर्चा में रहा।
पेयजल और बैठक जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद
कार्यक्रम में शामिल परिजनों के अनुसार, पीने के साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए कुर्सियों की भारी कमी रही। कई लोग धूप में खड़े रहे, तो कई बुजुर्ग जमीन पर बैठने को मजबूर नजर आए। पानी और भोजन के लिए लोगों को इधर-उधर भटकते देखा गया।
जल्दबाजी में आयोजन, तैयारी पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतने बड़े स्तर के आयोजन में यदि बुनियादी व्यवस्थाएं ही न हों, तो यह साफ तौर पर अपर्याप्त तैयारी और जल्दबाजी को दर्शाता है। आरोप है कि आयोजन गुणवत्ता के बजाय सिर्फ संख्या पूरी करने पर केंद्रित रहा।
आम लोगों को असुविधा, मंच पर विशेष सुविधाएं
कार्यक्रम के दौरान एक ओर जहां आम परिवार जमीन पर बैठकर रस्में निभाते दिखे, वहीं मंच पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए कुर्सियां, कूलर और अन्य सुविधाएं मौजूद रहीं। यही दृश्य लोगों में असंतोष और नाराजगी का कारण बना।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
250 जोड़ों जैसे बड़े आयोजन से पहले स्थल निरीक्षण और व्यवस्थाओं की समीक्षा क्यों प्रभावी नहीं रही, यह बड़ा सवाल बन गया है। यदि पूर्व तैयारी की गई थी, तो फिर आयोजन के दौरान अव्यवस्था क्यों दिखी—इस पर प्रशासन को जवाब देना होगा।
खुशी के दिन में परेशानी, संवेदनशीलता पर प्रश्न
स्थानीय लोगों का कहना है कि विवाह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवसर होता है। ऐसे दिन पर परिवारों को असुविधा झेलनी पड़े, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संवेदनहीनता भी है।
सूरजपुर का यह आयोजन एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया कि सरकारी योजनाएं वास्तव में लोगों की सुविधा के लिए हैं या केवल मंच, तस्वीर और औपचारिकता तक सीमित रह गई हैं।






