राजिम कुंभ कल्प मेला में जल संसाधन विभाग का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

पैरी नदी उद्गम और प्रस्तावित राजिम बैराज का कार्यशील मॉडल खींच रहा दर्शकों का ध्यान
राजिम। राजिम कुंभ कल्प मेला में जल संसाधन विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। खासतौर पर पैरी नदी के उद्गम स्थल और प्रस्तावित राजिम बैराज का कार्यशील मॉडल मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। स्टॉल पर दिनभर बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों की भीड़ देखने को मिल रही है।
जल संसाधन विभाग के स्टॉल में पैरी नदी के उद्गम स्थल भाटीगढ़ को मॉडल के माध्यम से दर्शाया गया है। यहां यह जानकारी दी जा रही है कि भाटीगढ़ से निकलने वाली पैरी नदी का जल सिकासेर बांध तक पहुंचता है, वहां से आगे कुकदा डेम होते हुए अंततः राजिम तक प्रवाहित होता है।
सिंचाई और पेयजल का प्रमुख स्रोत है पैरी नदी
स्टॉल पर उपस्थित टाइमकीपर सिद्धार्थ कुमार देवांगन ने बताया कि पैरी नदी का जल गरियाबंद, छुरा और राजिम क्षेत्र में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल एवं अन्य आवश्यक जरूरतों की पूर्ति करता है। पैरी नदी क्षेत्र के कृषि और जीवन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
95 करोड़ की लागत से प्रस्तावित है राजिम बैराज
स्टॉल में प्रस्तावित राजिम बैराज का भी विस्तृत मॉडल प्रदर्शित किया गया है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 95 करोड़ रुपये बताई गई है। प्रस्तावित बैराज की कुल लंबाई करीब 500 मीटर और ऊंचाई 5 मीटर होगी।
बैराज के निर्माण से राजिम और नवापारा क्षेत्र में जल संकट का स्थायी समाधान होगा और वर्षभर जलभराव बना रहेगा। इसके साथ ही नौकाविहार, वाटर स्पोर्ट्स और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भी दर्शाया गया
जल संसाधन विभाग गरियाबंद द्वारा प्रस्तुत इस कार्यशील मॉडल में राजीव लोचन मंदिर, लक्ष्मण झूला, गंगा आरती घाट, राजिम मेला स्थल, पैरी नदी, कालेश्वरनाथ मंदिर, नवागांव एनीकट और लोमश ऋषि आश्रम को भी दर्शाया गया है।
इसके अतिरिक्त पैरी नदी सिंचाई परियोजना, सिकासेर जलाशय, पैरी-घुमर व्यपवर्तन परियोजना सहित गरियाबंद जिले की विभिन्न सिंचाई योजनाओं के मॉडल भी प्रदर्शित किए गए हैं।
योजनाओं की जानकारी का केंद्र बना मेला
राजिम कुंभ कल्प मेला में जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए विभिन्न विभागों के स्टॉल लोगों के लिए जानकारी का प्रमुख केंद्र बन गए हैं। हितग्राही यहां योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और शासन की विकास योजनाओं से रूबरू हो रहे हैं।




