छत्तीसगढ़

मरवाही वनमण्डल के शासकीय वाहन का भयंकर दुरूपयोग अधिकारी आँख मूंद के बैठे हुए है

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मरवाही वनमण्डल के पेण्ड्रा वन परिक्षेत्र के अधिकरी ईश्वरी प्रसाद खूँटे पर शासकीय वाहन के दुरूपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं स्थानीय जागरूक नागरिकों के अनुसार जब से खूँटे की पद स्थापना पेण्ड्रा परिक्षेत्र में हुई है तब से स्ट्राईक फोर्स के शासकीय वाहन क्रमांक CG02F0017 बालेरो को अपने गृह जिला बालौदा बाजार के अंतर्गत अपने गृह निवास कसडोल दौड़ा दौड़ाकर कबाड़ कर डाले आज वो गाड़ी वनमण्डल कार्यालय के सामने भीख माँग रही है अब दूसरी आबंटित की गई स्ट्राईक फोर्स के शासकीय वाहन क्रमांक CG02F0163 बालेरो को हर सप्ताह के शासकीय अवकाश शनिवार रविवार को रेंजर खूँटे अपने गृह ग्राम कसडोल ले जातें हैं

शासकीय वाहन वन पर्यावरण जंगल सुरक्षा के लिए है कि उनके निजी काम घर आने जाने के लिए है क्या, सबसे बड़ा मुद्दा सीधे शासकीय वाहन एवं सरकारी राशि का दुरूपयोग है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्यवाही करने को तैयार नहीं, आँख मूँद के बैठे हुए है। सूत्रों के मुताबिक इनको वन मण्डलाधिकारी का संरक्षण प्राप्त है इस लिए अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नही कर रहे हैं।

इससे साफ जाहिर होता है कि सब मिली भगत से काम चल रहा है, जिबकि प्रधान मुख्यालय से जारी निर्देश मुख्य कार्यपालन अधिकारी कैम्पा का पत्र क्रमांक कैम्पा/एस. ओ./2024/49 रायपुर दिनाँक 21. 10.2024 को उक्त पत्र को जारी कर स्पष्ट रूप से निर्देश किया है कि भारत सरकार वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जारी गाईड लाईन में दिशा निर्देश के अनुसार परिक्षेत्र स्तरीय स्ट्राईक फोर्स के वाहन का उपयोग केवल परिक्षेत्र की सीमा के अंदर ही किया जाना है,

परिक्षेत्र के बाहर उपयोग किये जाने के दौरान घटना दुर्घटना होने पर जन हानि घायल या वाहन क्षति संबंधित वन मण्डलाधिकारी एवं संबंधित परिक्षेत्राधिकारी जिम्मेदार होगें, जिसके कारण कैम्पा मद से आबंटित परिक्षेत्र स्ट्राईक फोर्स के वाहनों को बाहर उपयोग नही किये जाने संबंधी निर्देश जारी किये हैं।

इसके बावजूद भी उच्चाधिकारी संज्ञान में नहीं ले रहे है, वन मण्डलाधिकारी मरवाही पेण्ड्रारोड के द्वारा वरिष्ट कार्यालय के निर्देशों का अवहेलना किया जा रहा है पेण्ड्रा रेंजर खूँटे अपने निजी उपयोग में शासकीय वाहन का भयंकर दुरूपयोग किया है इसके लिए वन मण्डलाधिकारी मरवाही कार्यवाही करेंगें या संरक्षण देकर उक्त मामले को दबा देंगें अगर ऐसा होता है तो पुनः मुख्यमंत्री वनमंत्री के पास शिकायत की नीव रखा जायेगा।

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