PM मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर सियासत गर्म, कांग्रेस ने उठाए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को संबोधित करने के बाद देश की राजनीति में एक नई हलचल पैदा हो गई है। उनके संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र और पाकिस्तान को सख्त संदेश ने जहां भाजपा नेताओं को उत्साहित किया, वहीं कांग्रेस ने कई तीखे सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर सवाल उठाते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक पुरानी टिप्पणी का हवाला दिया। बघेल ने पूछा कि क्या अमेरिका के दबाव में भारत ने कश्मीर पर अपनी नीति में बदलाव किया है? उन्होंने सरकार से पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष विराम की शर्तों को सार्वजनिक करने की भी मांग की।
बघेल ने यह भी सवाल उठाया कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद जिस ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की घोषणा की गई थी, क्या उसमें शामिल सभी आतंकियों को पकड़ लिया गया? अगर नहीं, तो फिर इस ऑपरेशन को सफल कैसे बताया जा सकता है? और यदि यह सफल था, तो इसे बीच में क्यों रोका गया?
भाजपा नेताओं ने पीएम मोदी के भाषण को ऐतिहासिक और निर्णायक करार दिया।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए देश के दुश्मनों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारत किसी भी साजिश का करारा जवाब देगा। मोदी जी ने यह साबित किया है कि भारत का कोई भी दुश्मन सजा से नहीं बचेगा।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान से कोई भी बातचीत केवल आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) के मुद्दे पर ही होगी। यह संबोधन भारत की सैन्य और कूटनीतिक शक्ति को दर्शाता है।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “मोदी जी ने साफ कहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। यह भारत की सख्त नीति का संकेत है।”
प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने देश की सुरक्षा नीति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है—जहां एक ओर सरकार इसे निर्णायक नीति बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सवालों के घेरे में ला रहा है।




