पत्रकार मुकेश की हत्या में शामिल आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्रकार के साथ बीजापुर पुलिस कप्तान की यह तस्वीर बताती है कि

न्याय पाना आसान नहीं होगा
पत्रकारों को संघर्ष जारी रखना होगा
चीते की खाल जैसी ड्रेस पहनकर जो शख्स नजर आ रहे हैं उनका नाम है जितेंद्र यादव. फिलहाल यादव साहब बीजापुर के पुलिस कप्तान है. उनके साथ पूर्व कलेक्टर अनुसार पांडे भी है, लेकिन चित्र में जो शख्स सफेद टी-शर्ट पहनकर स्मृति चिन्ह लेकर सम्मानित हो रहा है उस शख्स का नाम है सुरेश चंद्रकार. यह वहीं ठेकेदार हैं जो पत्रकार मुकेश चंद्रकार की हत्या में शामिल हैं.
कहा जाता है इस ठेकेदार के पास बहुत पैसा है और इसके हाथ-पांव बहुत लंबे है. जिसे चाहता है खरीद लेता है. बीजापुर में मुकेश चंद्रकार की हत्या के बाद यह चर्चा भी कायम है कि ठेकेदार ने लोकनिर्माण विभाग के एक अफसर को इस काम के लिए लगाया था कि वह मुकेश को पैसा देकर खरीद लें, लेकिन वह खबरों के लिए प्रतिबद्ध पत्रकार को खरीद नहीं पाया.
ठेकेदार के बारे में यह बात भी विख्यात है जब छत्तीसगढ़ में सलवा-जुडूम के बहाने आदिवासियों को मौत के घाट उतारने और उन्हें बेघर करने का खौफनाक दौर प्रारंभ हुआ था तब वह एसपीओ बन गया था.उसे मात्र दस हजार रुपए की तनख्वाह मिला करती थीं. एसपीओ रहते ही सुरेश चंद्रकार ने पुलिसवालों से अपने संबंध प्रगाढ़ किए और थानों में कंटीले तारों को लगाने का ठेका हासिल किया. खबर है कि पुलिस महकमा इस काम के लिए सुरेश चंद्रकार को बहुत अधिक भुगतान करता था. जब ठेकेदार के पास ज्यादा पैसा हो गया तो उसने अफसरों से सांठगांठ कर सड़क निर्माण का ठेका भी ले लिया.
बीजापुर के पत्रकार मुकेश की जघन्य हत्या में पुलिस कप्तान जितेन्द्र यादव
थानेदार दुर्गेश शर्मा और वहां पदस्थ तहसीलदार दुकालू राम की भूमिका को संदेहास्पद मानकर उन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं. जो खबरें छनकर आईं है उस पर भरोसा करें तो पता चलता है कि एसपी ने मुकेश को खोजने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थीं. बल्कि वे पूरे समय टालमटोल के अंदाज में ही थे. मुकेश के अंतिम बार का लोकेशन भी पत्रकारों ने ही ट्रेस किया था.
वैसे चर्चा तो यह भी है कि हत्या के आरोपी सुरेश चंद्रकार के साथ कप्तान साहब के बड़े मधुर संबंध थे. आरोपी के साथ कप्तान साहब की हंसती-मुस्कुराती हुई फोटो देखकर यह लगता तो नहीं है कि मुकेश के हत्यारों को कभी सजा मिल पाएगी और न्याय मिल पाएगा.