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उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत लैलूंगा क्षेत्र कि महिलाओं को मिल रही कौशल विकास प्रशिक्षण ।

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लैलूंगा :- आरएएमपी योजना के अंतर्गत रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकास खण्ड में ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता विकास कार्यक्रम का सफल आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता से जुड़े आवश्यक कौशल प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में सक्षम बनाना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को व्यवसाय प्रारंभ करने से लेकर उसे सफलता पूर्वक संचालित करने तक की समग्र जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के अंतर्गत उद्योग स्थापना, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल साक्षरता, उद्योग से संबंधित नियम-कानून, आवश्यक दस्तावेज़, वित्तीय परामर्श, उद्योग ऋण एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं से व्यवसाय को जोड़ने की विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है।
कार्यक्रम में  सीएसआईडीसी एवं जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी), रायगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनके सहयोग से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग एवं सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।
इस योजना के अंतर्गत कुल दो प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं :-
प्रथम : एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
द्वितीय : 14 दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम अब तक एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ढाप, सलखिया, नारायणपुर, भेलवांटोली, हिरापुर, केन्दाटिकरा सहित विभिन्न ग्रामों में सफलता पूर्वक संपन्न हो चुका है। वहीं 14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत :-
प्रथम : ढाप ग्राम में नर्सरी एवं क्राफ्टेड प्लांट आधारित उद्यमिता का प्रशिक्षण,
द्वितीय : नारायणपुर में सिलाई, बुनाई एवं कटाई से संबंधित उद्यमिता प्रशिक्षण,
सफलता पूर्वक पूर्ण किया जा चुका है।
वर्तमान में भेलवांटोली ग्राम में साबुन एवं सर्फ निर्माण से जुड़े 14 दिवसीय उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जबकि दिनांक 09 फरवरी 2026, सोमवार से सलखिया ग्राम में भी 14 दिवसीय उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। यह संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम भावसर फाउंडेशन द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य रायगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाओं एवं समुदाय को आत्मनिर्भर बनाना, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा देना तथा स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करना है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं में उद्यमशीलता की भावना को मजबूती मिल रही हैै। और वे आत्मविश्वास के साथ अपने स्वयं के व्यवसाय स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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