
रायगढ़ फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस घोटाला: नया साल, पुरानी लापरवाही! परिवहन मंत्री केदार कश्यप की चुप्पी, अमित कश्यप को किस नेता का संरक्षण?
रायगढ़@खबर सार :- नए साल की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का घोटाला थमने का नाम नहीं ले रहा। परिवहन विभाग की मिलीभगत से चल रहे इस संगठित अपराध ने न केवल ओडिशा सरकार को करोड़ों का राजस्व चूना लगाया है, बल्कि सड़कों पर मौत का तांडव भी मचा रहा है। जिला परिवहन अधिकारी अमित कश्यप पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद, राज्य के परिवहन मंत्री केदार कश्यप की ओर से कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई। सवाल उठ रहा है- आखिर ये रिश्ता क्या कहलाता है? क्या कश्यप बंधु की जोड़ी प्रशासनिक भ्रष्टाचार को ढाल दे रही है?
“दैनिक खबर सार” की खोजी टीम ने इस घोटाले को सबसे पहले उजागर किया था, और अब फॉलो-अप जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अमित कश्यप के कार्यकाल में रायगढ़ में फर्जी लाइसेंस बनाने का सिलसिला चरम पर पहुंच गया। ओडिशा के सैकड़ों निवासी बिना ट्रायल, पुलिस वेरिफिकेशन या असली दस्तावेजों के लाइसेंस हासिल कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि एजेंटों का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है, जो कार्यालय से नियंत्रित होता है। घोटाले के खुलासे के बाद विभाग ने दिखावटी कार्रवाई की- कुछ एजेंटों की आईडी बंद की गईं, लेकिन मीडिया बाइट के बाद अगले ही दिन चालू कर दी गईं। तीसरे दिन फिर सस्पेंड! यह ‘चालू-बंद’ का खेल क्या दर्शाता है? क्या यह उच्चाधिकारियों की मिलीभगत है, या अमित कश्यप का ‘जादू’?
एक अधिकारी कौशल्या रात्रि का बयान और संदिग्ध: “आईडी चालू-बंद रायपुर से होता है, हमें जानकारी नहीं।” लेकिन अगर ऐसा है, तो पहले बंद और फिर चालू होने का रहस्य क्या? स्थानीय पत्रकार इसे “मीडिया बाइट का जादू” कहते हैं, लेकिन सच्चाई कड़वी है- यह भ्रष्टाचार का चक्रव्यूह है। अमित कश्यप से जब संपर्क किया गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। क्या वे मीडिया से डरते हैं, या उनके पीछे कोई बड़ा हाथ है?
घोटाले का सबसे खतरनाक पहलू सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि है। पिछले दो सालों (2023-2025) में रायगढ़ में 500 से अधिक हादसे हुए, 150 से ज्यादा मौतें। आंकड़े चीख-चीखकर कहते हैं- फर्जी लाइसेंस वाले अनट्रेंड ड्राइवर ओवरस्पीडिंग, गलत साइड ड्राइविंग से मौत बांट रहे हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी: “ऐसे लाइसेंस सड़कों पर बम की तरह हैं। ग्रामीण इलाकों में संकरी सड़कें, ऊपर से अयोग्य ड्राइवर- दुर्घटनाएं 30% बढ़ गईं।” ओडिशा को राजस्व हानि लाखों में नहीं, करोड़ों में है, क्योंकि उनके निवासी छत्तीसगढ़ में ‘सस्ता’ फर्जीवाड़ा करा रहे हैं।
अब सवाल परिवहन मंत्री केदार कश्यप पर: नया साल 2026 आ गया, लेकिन जांच का नामोनिशान नहीं! क्या अमित कश्यप और केदार कश्यप के बीच कोई ‘पारिवारिक रिश्ता’ है, जो कार्रवाई रोक रहा है? विपक्षी नेता (कांग्रेस) ने विधानसभा में मुद्दा उठाने को कहा: “यह लापरवाही नहीं, संगठित अपराध है। रायपुर स्तर पर जांच हो, ओडिशा से संपर्क कर राजस्व वसूला जाए। दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।” स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा की मांग: “पिछले दो सालों के सभी लाइसेंस जांचें- वीडियो ट्रायल, वेरिफिकेशन, पते सब। बाहरी आवेदकों पर विशेष नजर।”
सरकार की चुप्पी संदेह बढ़ा रही है। सूत्रों के मुताबिक, रायपुर में ‘समीक्षा’ चल रही है, लेकिन बिना कार्रवाई के यह सिर्फ लीपापोती है। जनता पूछ रही- क्या प्रशासन सड़क सुरक्षा की जगह भ्रष्टाचार को प्राथमिकता दे रहा है? अगर जांच नहीं हुई, तो यह घोटाला और फैलेगा, मौतें और बढ़ेंगी। “दैनिक खबर सार” की अपील: पारदर्शिता लाएं, दोषियों को सजा दें। रायगढ़ की जनता इंतजार कर रही- क्या केदार कश्यप अब जागेंगे, या ‘रिश्ता’ सबकुछ ढक लेगा? समय की मांग है- सख्त कार्रवाई, नहीं तो सड़कें और लाल होंगी!




