धान खरीदी को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप, टोकन रोकने का दावा निराधार

जिले में धान खरीदी को लेकर सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनल DNI NEWS पर प्रसारित एक वीडियो में जिला प्रशासन एवं सहकारिता विभाग के निर्देशों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। वीडियो में यह दावा किया गया है कि प्रशासन किसानों के टोकन रोक रहा है, जबकि यह दावा पूर्णतः असत्य और भ्रामक है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में दिखाई गई सख्ती वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा के लिए है, न कि उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से।
निर्देशों का वास्तविक उद्देश्य
प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देश फर्जीवाड़े और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए थे—
सीमावर्ती जिले में बाहरी धान पर नियंत्रण: जिला सीमावर्ती होने के कारण अन्य राज्यों से बिचौलियों द्वारा लाए जा रहे अवैध धान को रोकने के लिए सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए।
कोचिया व बिचौलियों पर कार्रवाई: केवल वास्तविक किसानों का ही धान खरीदे जाने और कोचिया-बिचौलियों के धान को खपाने से रोकने के स्पष्ट निर्देश हैं।
सत्यापन के बाद टोकन: रकबा सत्यापन की प्रक्रिया इसलिए अपनाई जा रही है ताकि फर्जी रकबे पर धान की बिक्री न हो सके और वास्तविक किसान को उसका पूरा हक मिल सके।
आंकड़े कर रहे हैं भ्रामक प्रचार का खंडन
यदि प्रशासन का उद्देश्य टोकन रोकना होता, तो जिले की स्थिति राज्य औसत से बेहतर नहीं होती।
दिनांक 24 जनवरी 2026 तक के आंकड़े स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हैं—
रिकॉर्ड खरीदी: जिले के 92.17% किसान (82,198 किसान) अपना धान बेच चुके हैं, जबकि राज्य का औसत 85.60% है। जिला राज्य औसत से 6.57% आगे है।
पूरा धान बिका: जिले के 70.03% किसानों ने अपना 100% पंजीकृत धान बेच दिया है, जबकि राज्य का औसत केवल 49.86% है।
रकबा कवरेज: जिले के कुल पंजीकृत रकबे का 95.34% हिस्सा खरीदा जा चुका है।
प्रशासन की सख्ती केवल फर्जीवाड़ा करने वालों, कोचियों और अवैध धान खपाने वालों के खिलाफ है। वास्तविक किसानों के लिए टोकन जारी करने और धान खरीदी की प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू है, जिसका प्रमाण जिले का राज्य स्तर पर अग्रणी प्रदर्शन है।
किसानों से अपील
किसान भाई किसी भी प्रकार के भ्रामक वीडियो या अफवाहों से भ्रमित न हों। जिला प्रशासन पारदर्शी व्यवस्था के तहत किसानों के एक-एक दाने की खरीदी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।




