नीलगिरी लकड़ी तस्करी पर प्रशासन मौन, दिन-रात जारी अवैध परिवहन

सूचना के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचते अधिकारी, मिलीभगत के आरोप गहराए
सूरजपुर। जिले में नीलगिरी लकड़ी की अवैध कटाई, परिवहन और भंडारण का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले प्रकाशित समाचार के बाद भी प्रशासन की निष्क्रियता साफ नजर आ रही है। हालात यह हैं कि दिन-रात ट्रैक्टरों के जरिए लकड़ी का अवैध परिवहन खुलेआम जारी है, लेकिन न तो वन विभाग हरकत में है और न ही राजस्व अमला।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार जिले के कई इलाकों में भारी मात्रा में नीलगिरी लकड़ी का ग्राम पंचायत पचिरा में (अवैध भंडारण) किया गया है। इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है, इसके बावजूद न तो जांच की गई और न ही मौके पर कोई अधिकारी पहुंचा। इससे साफ जाहिर होता है कि मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि संभावित मिलीभगत का भी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लकड़ी तस्करों को पहले से ही संरक्षण मिला हुआ है, इसी कारण वे बिना किसी डर के बस्तियों और मुख्य मार्गों से लकड़ी ढो रहे हैं। ट्रैक्टरों में रस्सियों के सहारे लकड़ी बांधकर ले जाना आम बात हो गई है, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
सवाल यह है कि यदि कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? पूर्व में वन एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त कार्रवाई की गई थी, लेकिन उसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या तस्करों के पीछे कोई प्रभावशाली चेहरा है, जिसके दबाव में अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध भंडारण की स्पष्ट जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, तो क्या प्रशासन जानबूझकर परहेज कर रहा है? यदि यही रवैया रहा तो जिले की वन संपदा का तेजी से विनाश होगा और कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक चुप्पी साधे रहता है और कब अवैध कटाई, परिवहन व भंडारण करने वालों पर ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई करता है, या फिर यह अवैध कारोबार संरक्षण के साए में यूं ही फलता-फूलता रहेगा।




