क्या धरमजयगढ़ में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम सिर्फ जनप्रतिनिधियों का, बच्चे और आमनगरिकों से जिम्मेदारों को कोई मतलब नहीं

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बच्चे टेबल में, बाईक के ऊपर और कुर्सी में चढ़कर कार्यक्रम देखने को मजबूर।

प्रतीक मल्लिक

धरमजयगढ़ :- जिम्मेदारों की लापरवाही से धरमजयगढ़ के दशहरा मैदान में आज स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम में स्कूली बच्चे, पालक और ग्रामीण सांस्कृतिक कार्यक्रम का लुफ्त नहीं ले पा रहे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने के लिए स्कूली बच्चे और पलक कुर्सी में चढ़कर कार्यक्रम देखने को मजबूर है। और जो देख नहीं पा रहे कार्यक्रम वो जिम्मेदारों की लापरवाही को बोलते हुए बैरंग घर लौट रहे।



जनप्रतिनिधियों की सेवा सत्कार में जुट जिम्मेदार

बतादे कि बीते गुरुवार  को इस दशहरा मैदान में छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय का कार्यक्रम था जिस मंच में कार्यक्रम संचालित किया गया था  उस मंच का ऊंचाई लगभग फीट की थी । आज उसी मंच में फिर दुबारा जनप्रतिनिधियो को बैठाया गया वही बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम को जमीन में कराया जा रहा है जिस वजह से धरमजयगढ़ क्षेत्र के लोगों को सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने में  अत्यधिक कठिनाइयों का सामना  करना पड़ रहा है।



बच्चों को उतरा गया मंच से

मंच टूटने का हवाला देते हुए स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम देख रहे बच्चे मंच के ऊपर से उन्हें मंच से उतारा गया जबकि कल इसी मंच में लगभग सैकड़ों जनप्रतिनिधि, अधिकारी मौजूद थे तब यह बात नहीं आई कि मंच में उसकी क्षमता से अधिक लोग है पर आज कुछ बच्चों के मंच में चढ़ जाने से उन्हें यह कहकर उतरा गया कि मंच में क्षमता से अधिक व्यक्ति हो गए है । अगर संस्कृति कार्यक्रम मंच में होता तो बच्चे नीचे से ही कार्यक्रम का लुफ्त उठाते पर यहां तो जिम्मेदारों को जनप्रतिनिधियों का वाह वही चाहिए शायद जिस वजह से कार्यक्रम को जमीन में कराया गया ।



दशहरा मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम को कराने के लिए क्या कोई रूप रेखा पूर्व में नहीं बनाई गई, अगर बनाई गई रूपरेखा तो यह ख्याल नहीं रखा गया कि स्वतंत्रता दिवस के दिन करीब हजारों की संख्या में लोग कार्यक्रम को देखने आते है अगर जमीन में कार्यक्रम को कराया जाएगा तो दर्शक कार्यक्रम का लुफ्त नहीं ले सकेंगे। क्या सांस्कृतिक कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों को ही मंच में बैठाकर अपना वाहवाही लेने के लिए कराया जाता है पब्लिक किस तरफ तकलीफ में कार्यक्रम देख रहा है उन्हें कोई फर्क नहीं।

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