शराब पीकर शिक्षक आता है स्कूल, csc ने कहा मैंने जांच में नहीं पाया

ग्राम पंचायत विजयनगर के ग्राम कणड्रजा में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने अपने ही स्कूल की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। बच्चों ने बताया की शिक्षक स्कूल के समय शराब का सेवन कर पढ़ाने आता है, वही जिस सीएससी को स्कूल के निरक्षण की जिम्मेदारी दी गई है वही सीएससी बच्चों पर ही सवाल खड़ा कर दे रहें हैं।
मामला प्राथमिक शाला कणड्रजा का हैं जहा स्थानीय लोगों के माध्यम से सुचना मिली की स्कूल में मौजूद शिक्षक शराब का सेवन कर शाला में आता है तब शाला में जाकर पता चला की उस समय सीएससी भी वहा मौजूद थे जो शाला निरक्षण के लिए आए थे। वही सीएससी ने बताया की स्कूल में ऐसी कोई समस्या नहीं है। जिसके बाद ज़ब बच्चों से पुछा गया तब बच्चों ने पूरे खेल का भांडाफोड दिया।
बच्चों ने बताया हकीकत
बच्चों से बात करने पर वह डरे हुए प्रतीत हुए और वह डर के कारण कुछ बताना नहीं चाह रहें थे। पर ज़ब लम्बी बात चीत के बाद बच्चों को भरोषा हुआ तब उन्होंने बताए की हा शिक्षक शराब पीकर आता है और उसी दिन सुबह उसने 2 ग्लास शराब पी है।
सीएससी ने कहां की
उक्त पूरे घटनाक्रम के बाद ज़ब अन्य स्कूल जाकर इस मामले में सीएससी से जानकारी मांगी गई तब उन्होंने बताया की ऐसी कोई शिकायत उनके पास नहीं आई है जिसके बाद उन्हें कहा गया की बच्चों ने कैमरे के सामने कहा है तब वह बच्चों की बात झूठलाने लगे और कह दिया कि मैं जांच किया हु ऐसा कुछ नहीं है पर बच्चों के कथन पर वह गोल मटोल बाते करने लगे।
बच्चों के भविष्य से खेला जा रहा खेल
उक्त घाटनाक्रम को देखा जाए और बच्चों के कथन का वीडियो साथ ही सीएससी के कथन का वीडियो देखा जाए तब साफ पता चल रहा की यहां बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा, क्युकी बच्चों ने अपनी आपबीती सीएससी को ना सुनकर बाहरी व्यक्तियों को सुनाई। वही सवाल यह खड़ा होता है कि क्या ऐसे मामले में शिक्षक और सीएससी मिले हुए है जो बच्चें सीएससी से ना कहकर अन्य व्यक्तियों से अपनी आपबीती सुना रहें हैं।
सीएससी पहले भी दे चुके है शिक्षक को चेतावनी
सीएससी ने बताया की वह पहले भी शिक्षक को शराब के मामले में चेता चुके है और अभी की उनको जानकारी नहीं। जिससे साफ स्पष्ट होता है की शिक्षक शराबी है इसकी जानकारी उन्हें है वरना सीएससी ऐसी बात नहीं कहते। वही अगर पहले सीएससी ने शिक्षक को चेताया है तब उन्होंने इसकी जानकारी उच्चाधिकारी को क्यू नहीं दी वह क्यू बच्चों के भविष्य से खेलवाड़ करते रहें। आखिर ऐसा क्या स्वार्थ था जो वह शिक्षक को बचाते आ रहें हैं।




