बिसरा स्कूल शिक्षिका की नियुक्ति पर संदेह, प्रमाण पत्रों की जांच में उठे सवाल

सुंदरगढ़। सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय, बिसरा में पदस्थ शिक्षिका इंदु राय की नियुक्ति और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूचना का अधिकार (RTI) के तहत एक याचिकाकर्ता ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से इंदु राय की नियुक्ति और प्रमाण पत्रों से संबंधित जानकारी मांगी थी। लेकिन, जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने मामला राज्य सूचना आयोग के समक्ष दर्ज कराया।
इससे पहले भी इंदु राय की प्राथमिक से लेकर नौवीं कक्षा तक की शैक्षणिक जानकारी नहीं दी गई थी, जिसकी शिकायत फिलहाल राज्य सूचना आयुक्त के पास विचाराधीन है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इंदु राय जिस कलपतरू वाणी बिहार संस्कृत विद्यालय से दसवीं पास करने का दावा करती हैं, वह विद्यालय अस्तित्व में ही नहीं मिला। परीक्षा प्रवेश पत्र के अनुसार जिस विद्यालय से उन्होंने दसवीं की परीक्षा देने की बात मानी है, वह स्कूल दसवीं बोर्ड परीक्षा केंद्र के रूप में पंजीकृत ही नहीं था। इतना ही नहीं, श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री विहार पूरी के पास भी ऐसे किसी विद्यालय का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, इंदु राय के पास उपलब्ध प्रमाण पत्रों में दर्शाया गया है कि उन्होंने 30 वर्ष की आयु में ओड़िया माध्यम से नियमित छात्रा के रूप में दसवीं की परीक्षा पास की और प्रमाण पत्र श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय से जारी हुआ है।
इन विरोधाभासों ने नियुक्ति प्रक्रिया और प्रमाण पत्रों की सत्यता पर बड़े पैमाने पर संदेह खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है बल्कि भ्रष्टाचार की जड़ों को भी उजागर करता है।




