सिपाही के खिलाफ शुरू की जांच: अफसरों के पास जाओ तो कहते हैं… महेश से मिलो, थाने के पीछे अलग कमरा, वहीं लगती है केस निपटाने की बोली
टिकरापारा में मोटर गैरेज के संचालक शहजाद आत्म हत्याकांड के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। शहजाद की मौत में थाने के सिपाही महेश नेताम की भूमिका की जांच भी की जा रही है। मृतक और उसके बेटे के खिलाफ केस दर्ज होने में इस सिपाही की भूमिका क्या है? इस एंगल अपने सुसाइड नोट में मृतक ने सबसे पहला नाम महेश का ही लिखा है।
आत्महत्या के बाद थाने का घेराव करने वाली नाराज भीड़ में यही चर्चा थी कि थाने में टीआई के पास कोई शिकायत लेकर जाओ तो वे सिपाही महेश के पास ही भेजते हैं। वह ज्यादातर समय थाने के पीछे अलग से बने कमरे में बैठता है और वहीं केस निपटाता है।
शहजाद के सुसाइड नोट में नाम आने के बाद से महेश थाने नहीं पहुंचा है, जबकि चर्चा यही है कि पूरा थाना वही चलाता है। वह अपने इलाकों के कुछ बड़े अफसरों को सीधे रिपोर्ट करता है। महेश के अलावा दो सिपाही और हैं, जिनके काम-काज को लेकर पूरे इलाके में चर्चा है।
थाना स्तर पर कोई भी केस निपटाने के लिए उन्हीं से संपर्क करना पड़ता है। शहजाद के मामले में भी महेश सबसे आगे था। 19 नवंबर की रात शहजाद को पुलिस ने थाने से छोड़ा जरूर लेकिन महेश लगातार उसके संपर्क में था। उससे पैसों की मांग कर रहा था।
मृतक की पत्नी ने खुद बताया कि पैसे नहीं देने पर वह उन पर दर्ज केस में नई धाराएं लगाकर लंबे समय तक जेल भेजने की धमकी दे रहा था। महेश अक्सर बिना वर्दी के रहता है। वह अफसरों के सामने ऐसा बर्ताव करता है जैसे ही थानेदार है। कुछ आला अफसरों की शह होने के कारण कोई उसे रोकता-टोकता नहीं है।
समझें पूरा विवाद… पहले बेटे के खिलाफ किया केस फिर शहजाद को भी
शहजाद के बेटे का 6 नवंबर को निजाम, विक्की और लक्की के साथ किसी बात पर विवाद हुआ था। रात तकरीबन 11 बजे तीनों आरोपियों ने शहजाद के बेटे सैफ को टैगोर नगर के पास रोका और उसके साथ लात घूंसे और राड से मारपीट की। सैफ अपने पिता के साथ कोतवाली थाने गया वहां उन्होंने मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई।
इस मामले में बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और केस खारिज कर दिया गया। 16 नवंबर को साजिद अली ने शहजाद, उसके बेटे सैफ और हाशिम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। पुलिस ने तीनों को अगले दिन यानी 17 नवंबर को हिरासत में लिया। उसके बाद 27 घंटे थाने में रखा।
परिवार के लगातार दबाव के बाद पुलिस ने 19 नवंबर की रात शर्त के साथ छोड़ा कि अगले दिन आप आएंगे। उसके बाद से शहजाद बेहद तनाव में था। उसे बार-बार ये धमकी दी जा रही थी कि उसके खिलाफ ऐसा केस बनाया जाएगा कि जमानत नहीं मिलेगी। उसी डर से शहजाद ने खुदकुशी कर ली।
शहर के कुछ और ऐसे थाने जहां चलता है सिपाहियों का सिक्का
शहर के कुछ और बड़े थाने हैं जिसे सिपाही हवलदार ही चला रहा हैं। थानेदार आते हैं कुछ माह रहते हैं, उनका ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन सिपाही-हवलदार बरसों से वहीं जमे हैं। उसी बात का फायदा उठाकर वे केस निपटाने का काम करते हैं।
टिकरापारा थाने के बारे में यही चर्च है कि वहां एक बार कोई लिखित शिकायत कर दे, उसके बाद अगर प्रार्थी भी केस वापस लेना चाहे तो थाने वाले नहीं लेने देते जब तक कि उसमें लेन-देन न हो जाए। दोनों पक्ष से पैसे लेने की चर्चा है। शहजाद आत्महत्याकांड में भी यही आरोप लग रहे हैं। पुलिस ने एक पक्ष से पैसे लेकर झूठा केस बनाया और दूसरे पक्ष को गंभीर धाराएं लगाकर जेल भेजने के लिए धमकी दे रहे थे।
थानों में चर्चित किरदार
- खमतराई में सिपाही
- कोतवाली में एएसआई
- कबीरनगर में पेट्रोलिंग टीम
- गुढियारी में सिपाही
- उरला में सिपाही
- पुरानी बस्ती में पेट्रोलिंग
- तेलीबांधा में हवलदार
- खरोरा, तिल्दा आरंग में




