देश के सबसे बड़े छठघाट का ड्रोन video: बिलासपुर में अरपा किनारे उमड़ी भीड़, उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूरा किया 36 घंटे का व्रत

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देश के सबसे बड़े छठ घाट बिलासपुर के अरपा नदी के तट पर शुक्रवार को छठ महापर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गुरुवार की शाम और शुक्रवार की सुबह व्रती महिलाओं के साथ पुरुषों ने भी उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व मनाया।

लोगों की मान्यता है कि छठ पर्व पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से सभी मन्नतें पूरी हो जाती है। हर साल की तरह इस बार भी दैनिक भास्कर ने इस आकर्षक नजारे का ड्रोन वीडियो तैयार किया है।

मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाने वाला छठ पर्व अब छत्तीसगढ़ के साथ ही बिलासपुर में भी उत्साह के साथ मनाए जाने लगा है। यही वजह है कि यहां अरपा नदी के तट पर देश का सबसे बड़ा स्थायी छठघाट तैयार किया गया है, जहां हर साल व्रतियों की भीड़ बढ़ रही है।

चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व पर दिवाली के बाद दूसरी दिवाली की झलक नजर आई। इस दौरान श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। करीब 1000 हजार मीटर के इस घाट में अर्घ्य देने वाली व्रतियों की भीड़ नजर आई। दावा किया जा रहा है कि आयोजन में 50 हजार से ज्यादा लोग छठ घाट पर पहुंचे।

तड़के तीन बजे से घाट पर पहुंचने लगे श्रद्धालु शुक्रवार तड़के 3 बजे से गाजे-बाजे के साथ लोगों के दौरा और गन्ना लेकर छठ घाट पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान पहले घाट पर दौरा का पूजा की।

जिसके बाद छठी मईया की विधि-विधान से पूजा-आराधना कर अरपा नदी में दीपदान कर व्रत करने वाले लोग एक-एक कर पानी के अंदर गए। कमर तक पानी के बीच उगते सूर्य को अर्घ्य दिया।

कमर भर पानी में उदयमान सूर्य का इंतजार, सुख, समृद्धि की मंगलकामना छठ घाट में व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया और परिवार की सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। व्रतियों ने उदयनमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पानी पीकर उपवास खोला।

भक्ति और लोक आस्था का सूर्योपासना पर्व पर श्रद्धालु सूर्य के उदय होने का इंतजार करते हुए कमर भर पानी में घंटों तक खड़े रहे। सुबह सूर्यदेव की किरणों के दर्शन होते ही व्रतियों ने जल और दूध से अर्घ्य दिया, विधि विधान से उनकी पूजा-अर्चना कर छठ मइया व सूर्य देव से परिवार की सुख समृद्वि व शांति की कामना की।

खरना का प्रसाद लेकर किया कठिन व्रत छठ पर्व पर की शुरुआत पांच नवंबर यानी मंगलवार से शुरू हुई। पहले दिन नहाय खाय के साथ लौकी भात बनाकर व्रतियों ने व्रत शुरू किया। इस दिन छठघाट पर अरपा मईया की महाआरती की गई थी। फिर दूसरे दिन बुधवार को व्रतियों ने मिट्‌टी के चूल्हे में खरना का प्रसाद बनाकर छठी मइया को भोग लगाया।

जिसके बाद तीसरे दिन गुरुवार की शाम छठ घाट में सामूहिक रूप से छठी मइया की पूजा-आराधना की और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य की आराधना व अर्घ्य देने के साथ ही पर्व का समापन हुआ। जिसके बाद महिलाओं ने 36 घंटे की कठिन व्रत की पारणा की।

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