लैलूंगा में प्रशासन के खिलाफ फूटा जनआक्रोश: SDM के तबादले की उठी मांग, जनता बोली – अब ‘जांच’ नहीं, ‘कार्रवाई’ चाहिए!

लैलूंगा । “जांच की जा रही है”, “प्रकरण विचाराधीन है”, “उचित कार्रवाई होगी” — ये जुमले अब लैलूंगा की जनता को रटे-रटाए लगने लगे हैं। कारण साफ है — न तो कोई ठोस जांच हुई, न कार्रवाई हुई और न ही अव्यवस्थाओं का समाधान। अब लोगों का सब्र जवाब दे चुका है। हर गली, हर पंचायत में एक ही सवाल गूंज रहा है — “SDM मैडम का तबादला कब होगा?”
प्रशासनिक ठहराव से नाराज़ जनता
पटवारी मनमानी, ट्रैफिक अव्यवस्था, राशन वितरण में अनियमितता और किसान समस्याएं — लैलूंगा इन सबका केंद्र बन चुका है। जनता का आरोप है कि शिकायतों के अंबार के बावजूद SDM कार्यालय की ओर से न कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही जवाबदेही तय हुई। हर बार सिर्फ जवाब आता है — “मामला जांचाधीन है।”
पटवारियों पर लगे गंभीर आरोप, फिर भी मौन प्रशासन
पटवारी संगीता गुप्ता समेत कई हलकों के पटवारियों के खिलाफ किसानों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने, रिश्वत मांगने और दफ्तर में अनुपस्थिति की शिकायतें दी हैं। वीडियो, दस्तावेजी प्रमाण और धरना-प्रदर्शन तक हुए, लेकिन अब तक कोई जांच अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। न कोई रिपोर्ट बनी, न कार्रवाई हुई।
ट्रैफिक अव्यवस्था से सड़कें बनीं ‘मौत का फंदा’
बीते कुछ महीनों में लैलूंगा की सड़कों पर हुए हादसों में कई युवाओं ने जान गंवाई है। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से न तो स्पीड ब्रेकर बनाए गए, न संकेत बोर्ड लगे, और न ही स्कूल जोन मार्किंग की गई। स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने ज्ञापन दिए, चक्काजाम किया, पर जवाब वही – “फॉरवर्ड कर दिया गया है।”
राशन वितरण में गड़बड़ी, पात्र हितग्राही वंचित
कई गाँवों में महीनेभर से राशन नहीं मिला। पुराने डेटा के आधार पर वितरण हो रहा है, जिससे सैकड़ों गरीब परिवार वंचित रह गए हैं। सूत्रों के अनुसार, कई दुकानों की शिकायतें SDM ऑफिस की फाइलों में धूल फांक रही हैं।
किसानों की समस्याओं पर भी चुप्पी
फसल बीमा, भूमि रिकॉर्ड, खेतों की नपाई जैसे अहम मुद्दों को लेकर किसानों ने बार-बार आवेदन दिए हैं, पर उन्हें सिर्फ तारीखों का इंतजार मिला। किसानों का कहना है, “ऐसा लगता है अधिकारी आवेदन रिसाइकल करने के लिए ले रहे हैं।”
जनता की जुबान पर एक ही सवाल – “तबादला कब होगा?”
जनता अब मुखर है। सोशल मीडिया से लेकर पंचायत बैठकों तक चर्चा है कि अगर SDM समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रही हैं, तो फिर उन्हें पद पर बनाए रखने का क्या औचित्य है?
चैंबर ऑफ कॉमर्स और विधायक की भी नाराज़गी
चैंबर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष मनीष मित्तल ने कहा –
“स्कूल समय में भारी वाहनों की नो एंट्री की मांग लंबे समय से हो रही है। ज्ञापन, आंदोलन, चक्काजाम — सबकुछ हो चुका है, लेकिन प्रशासन ने एक भी कदम नहीं उठाया।”
विधायक विद्यावती सिदार ने भी प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा –
“जनता की सेवा और समस्याओं के समाधान के लिए ही अधिकारियों की पदस्थापना होती है। अधिकारी चाहे कोई भी हो, जनता को जवाब देना होगा।”
“लैलूंगा बचाओ जनअभियान” की पांच मांगें:
1. SDM का तत्काल तबादला
2. यातायात व्यवस्था का सख्ती से पुनर्गठन
3. पटवारियों पर जांच और निलंबन
4. राशन दुकानों की उच्च स्तरीय जांच
5. किसानों की समस्याओं पर तत्काल कार्यवाही
अब चेतावनी का समय है, सिर्फ जांच नहीं – परिणाम चाहिए
लैलूंगा की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है। आवेदन और ज्ञापन अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँच चुके हैं। “लैलूंगा बचाओ जनअभियान” ने साफ कर दिया है —
“अब कार्रवाई नहीं हुई, तो सड़कों पर उतरेंगे।”




