राउरकेला में बुलडोजर कार्रवाई पर विधायक शारदा प्रसाद नायक का विरोध, सोशल मीडिया में उठा पक्षपात का सवाल

राउरकेला । गुरुद्वारा रोड स्थित एक होटल समेत कुछ भवनों को तोड़ने की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राउरकेला विधायक शारदा प्रसाद नायक का विरोध अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है। सोमवार सुबह प्रशासन द्वारा प्रस्तावित तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान विधायक के मौके पर पहुंचने और खुलेआम विरोध करने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
सोमवार को सुबह से ही गुरुद्वारा रोड इलाके में पुलिस बल, बुलडोजर और प्रशासनिक अधिकारी तैनात थे। तहसीलदार, सब-कलेक्टर, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और संबंधित विभागों की मौजूदगी में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की जानी थी। इसी दौरान विधायक शारदा प्रसाद नायक मौके पर पहुंचे और कार्रवाई को “असंवैधानिक, राजनीति से प्रेरित और बदले की भावना से की जा रही” बताते हुए इसका विरोध किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विधायक कभी बुलडोजर पर चढ़ते दिखे तो कभी घर के सामने खाली जमीन पर धरने पर बैठ गए, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई कुछ समय के लिए बाधित हुई। इस घटनाक्रम को राउरकेला के लगभग सभी स्थानीय मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर विधायक को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूज़र्स ने कमेंट बॉक्स में सवाल उठाया कि जब इससे पहले मंटोला बस्ती, बंडामुंडा और अन्य इलाकों में विकास, सौंदर्यीकरण और फ्लाईओवर निर्माण के नाम पर गरीबों के घर तोड़े गए, तब विधायक की कोई सार्वजनिक भूमिका नजर क्यों नहीं आई।
समाजसेवी मिनाती देवता ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो बयान में कहा कि विधायक शारदा नायक उस समय चुप रहे जब गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे थे। उन्होंने विधायक को “अमीरों का नेता” बताते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान विरोध चयनात्मक है।
पक्षपात के आरोप
सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने आरोप लगाया कि विधायक यह विरोध अपने करीबी बताए जा रहे व्यक्ति प्रविण गर्ग के होटल और मकान को बचाने के लिए कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और विधायक या संबंधित पक्ष की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जनता के सवाल
एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि का सड़क पर धरने पर बैठना और बुलडोजर पर चढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करना—इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में यह बहस छेड़ दी है कि क्या कानून सबके लिए समान है, या फिर प्रभावशाली लोगों के मामलों में अलग रुख अपनाया जाता है।




