
रायगढ़@खबर सार :- रायगढ़ जिला मुख्यालय का सबसे प्रतिष्ठित और जिम्मेदार माना जाने वाला ‘कोतवाली थाना’ आज अपनी कार्यशैली को लेकर आम जनता के बीच सवालों के घेरे में है। जिस थाने पर शहर की सुरक्षा का जिम्मा है, वही थाना आज अपनी सुस्ती, लापरवाही और चयनात्मक कार्यवाही के लिए चर्चा का विषय बन चुका है। अपराधियों में पुलिस का खौफ इस कदर खत्म हो चुका है कि सरेराह वारदातें हो रही हैं, और पुलिस केवल फाइलों के पन्ने भरने में व्यस्त है।
रसूखदारों को अभयदान: मारपीट की घटना में ‘वाहन’ को क्यों बचाया गया?
हाल ही में कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत हुई मारपीट की घटना का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो पुलिस ने आनन-फानन में कार्यवाही का ढोंग रचा। आरोपियों पर केस तो दर्ज हुआ, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना में प्रयुक्त वाहनों को जब्त क्यों नहीं किया गया? कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी अपराध में इस्तेमाल किया गया वाहन ‘प्रॉपर्टी ऑफ क्राइम’ होता है। क्या उन महंगी गाड़ियों के मालिकों के रसूख के आगे कोतवाली पुलिस नतमस्तक है? यह चयनात्मक कार्यवाही पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
होटल ट्रिनिटी प्रकरण: मालिकों को ‘क्लीन चिट’ देने की जल्दबाजी क्यों?
शहर के चर्चित होटल ट्रिनिटी और अन्य व्यापारिक संस्थानों में जब अनियमितताएं पाई गईं, तो पुलिस की कार्यवाही का डंडा केवल किराएदारों या छोटे कर्मचारियों पर चला। होटल मालिकों को पूरी तरह से जांच के दायरे से बाहर रखना किस ओर इशारा करता है? क्या पुलिस यह मान चुकी है कि बिना मालिक की जानकारी के होटल में अवैध गतिविधियां संचालित हो सकती हैं? यह ‘भेदभाव पूर्ण’ कार्यवाही पुलिस की मिलीभगत की ओर संकेत करती है।

देहव्यापार का फलता-फूलता जाल और ‘नॉमिनल’ जांच:
कोतवाली थाना क्षेत्र में स्थित कई होटलों और लॉज में जिस्मफरोशी का धंधा पैर पसार चुका है। स्थानीय नागरिकों द्वारा बार-बार शिकायतें और सूचनाएं दी जाती हैं, लेकिन पुलिस की टीम वहां केवल ‘रजिस्टर चेकिंग’ का नाटक करने पहुँचती है।
•क्या संदिग्ध कमरों की तलाशी ली गई?
•क्या वहां रुकने वाले लोगों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन हुआ?
जवाब ‘ना’ में है। जब तक कार्यवाही केवल कागजी जांच तक सीमित रहेगी, तब तक अनैतिक व्यापार करने वालों के हौसले बुलंद रहेंगे।
अवैध शराब का ‘ओपन मार्केट’: रात होते ही बदल जाती है शहर की सूरत:
रायगढ़ को ‘नशामुक्त’ करने के दावे कोतवाली क्षेत्र में आकर दम तोड़ देते हैं। रात के अंधेरे में शहर के कई संवेदनशील इलाकों में अवैध शराब की बिक्री खुल्लेआम हो रही है। सूत्रों की मानें तो पुलिस की पेट्रोलिंग टीम इन जगहों से केवल ‘औपचारिकता’ निभाकर गुजर जाती है। कार्यवाही के नाम पर किसी राह चलते पियक्कड़ को पकड़ लेना ही कोतवाली पुलिस की उपलब्धि बनकर रह गई है, जबकि मुख्य शराब तस्कर और अवैध अड्डे चलाने वाले बेखौफ अपना साम्राज्य चला रहे हैं।
बाइक चोरी का हब: पुलिस की गश्त पर उठते सवाल:
कोतवाली क्षेत्र में बढ़ती बाइक चोरी की वारदातें अब आम हो गई हैं। हर दूसरे दिन एक नई एफआईआर दर्ज होती है, लेकिन नतीजा ‘सिफर’ रहता है। बाइक चोरों ने पुलिस के गश्त और खौफ को ठेंगे पर रख दिया है।
•क्या पुलिस की मुखबिर प्रणाली पूरी तरह फेल हो चुकी है?
- क्या सीसीटीवी कैमरों की निगरानी केवल दिखावा है?
शहर के व्यापारिक केंद्र में बाइक चोरी का बढ़ना यह बताता है कि पुलिस का सुरक्षा घेरा पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो चुका है।
जनता की अदालत में पुलिसिया तंत्र:
रायगढ़ की जनता अब यह पूछ रही है कि आखिर कोतवाली थाना प्रभारी की यह ‘रहस्यमयी सुस्ती’ किसके संरक्षण में है? क्या पुलिस का काम केवल शिकायतें दर्ज करना है या अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा करना भी है?
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही इन बिंदुओं पर कड़ी और निष्पक्ष कार्यवाही नहीं हुई, तो वे उच्च अधिकारियों और गृह मंत्रालय तक इस लचर व्यवस्था की शिकायत करने को मजबूर होंगे।




