
बलरामपुर जिला मुख्यालय में करोड़ों रुपए की लागत से बना न्यू बस स्टैंड बदहाली का शिकार हो चुका है। इसे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था, लेकिन आज यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। महिला प्रतीक्षालय और शौचालय की स्थिति दयनीय हो चुकी है, जिससे महिला यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

यह बस स्टैंड छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों से आने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में अगर यहां बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, तो जिले की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। स्थानीय लोगों और बस एजेंटों ने इस बदहाल स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि बस स्टैंड में न तो स्वच्छ शौचालय हैं और न ही बैठने की उचित व्यवस्था। वहीं, नगर पालिका प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
शाम होते ही असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है बस स्टैंड
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च कर बने इस बस स्टैंड का सही उपयोग नहीं किया गया, जिससे यह असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। शाम होते ही यहां नशेड़ी और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे यात्रियों को असुरक्षित माहौल का सामना करना पड़ता है।
सफाई व्यवस्था भी लचर, यात्रियों को हो रही परेशानी
बस स्टैंड की सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई हुई है। यात्रियों को बैठने में भी घुटन महसूस होती है। गंदगी और दुर्गंध के कारण यहां रुकना मुश्किल हो गया है। यात्रियों का कहना है कि नगर पालिका के अधिकारी खुद तो स्वच्छ शौचालयों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन आम यात्रियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लोग स्वच्छ पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं, जिससे प्रशासन की लापरवाही साफ झलकती है।
बस एजेंटों ने जताई नाराजगी
बलरामपुर बस स्टैंड की दुर्दशा को लेकर बस एजेंट फिरोज खान ने कहा,
“यह बस स्टैंड सिर्फ नाम का स्टैंड बनकर रह गया है। यहां न पानी है, न शौचालय। खासकर महिला यात्रियों के लिए तो यह बस स्टैंड किसी अभिशाप से कम नहीं है। गढ़वा, डाल्टनगंज और अन्य जगहों से यात्रा कर रही महिलाओं के लिए शौचालय तक की सुविधा नहीं है। शौचालय तो बना है, लेकिन अब वह खंडहर बन चुका है।”
गर्मी में यात्रियों को खरीदकर पीना पड़ता है पानी
बस स्टैंड में पीने के लिए स्वच्छ पानी तक उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को मजबूरन पैसे देकर पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका यात्रियों के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था तक नहीं कर पा रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगा या फिर यात्रियों को इसी तरह परेशान होना पड़ेगा?




