
सिविल लाइन थाने के बाद सकरी थाने में भी शिकायत दर्ज, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल
बिलासपुर। शिक्षा विभाग के व्याख्याता राम प्यारे कश्यप के खिलाफ धोखाधड़ी के दो मामले दर्ज किए गए हैं। पहली शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई गई थी, जहां कश्यप पर फर्जी ट्रांसफर पत्र देकर ठगी करने का आरोप लगा। हालांकि, पुलिस ने सिर्फ औपचारिक पूछताछ कर उसे छोड़ दिया। अब दूसरी शिकायत सकरी थाने में दर्ज की गई है, जहां आरोपी पर शिक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है।
धोखाधड़ी का पूरा मामला
शिकायतकर्ता परदेशी लाल करार, निवासी ग्राम रोगदा, नवागढ़ (जांजगीर-चांपा), ने बताया कि राम प्यारे कश्यप, जो रिश्ते में उनका साला है, ने सहायक शिक्षक के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया। कश्यप ने दावा किया कि उसके उच्च अधिकारियों और मंत्रियों से अच्छे संबंध हैं और यदि कुछ खर्च किया जाए तो नौकरी पक्की हो सकती है। इस भरोसे पर परदेशी लाल ने 3 अक्टूबर 2021 को दो लाख रुपये और फिर 14 मई 2023 को तीन लाख रुपये, कुल मिलाकर पांच लाख रुपये, राम प्यारे कश्यप को सौंपे।
वादे अधूरे, मिली सिर्फ धमकियां
पैसे लेने के बाद राम प्यारे कश्यप ने नौकरी लगवाने के वादे को टालना शुरू कर दिया। जब परदेशी लाल ने पैसे वापस मांगे तो कश्यप ने आवेदन की समयसीमा निकलने का बहाना बनाकर दुबारा आवेदन करने को कहा। इसके बाद भी नौकरी नहीं लगी और न ही पैसे लौटाए गए। जब शिकायतकर्ता अपनी पत्नी के साथ पैसे मांगने गया तो आरोपी ने गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी और घर से बाहर निकाल दिया।
सकरी पुलिस की भूमिका पर सवाल
अब देखना यह है कि सकरी पुलिस इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती है। क्या यह मामला भी सिविल लाइन थाने की तरह महज औपचारिकता तक सीमित रहेगा या फिर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी? पीड़ित ने सकरी थाने में शिकायत दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
आरोप गंभीर, जांच जरूरी
राम प्यारे कश्यप के खिलाफ लगातार सामने आ रहे धोखाधड़ी के मामलों ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।