समाज में बदलाव के लिए एड्स की मिथकी को तोड़ने और लोगों को सही जानकारी देने की जरुरत- डा. नंदिनी षंढ
विश्व एड्स दिवस पर जाने माने डॉक्टर नंदिनी ने साझा किया एड्स से सबंधित कुछ संक्षिप्त टिप्स
विश्व में 3.9 करोड़ और भारत में 25 लाख लोग एचआईवी पीड़ित
चक्रधरपुर। समाज में बदलाव के लिए एड्स की मिथकी को तोड़ने और लोगों में सही जानकारी फैलाने की आवश्यकता है। एडस पीड़ित को सम्मान दें और उसे समाज से अलग न करें तभी हमारे समाज में एड्स के बारे लोगों में जो भ्रांतियां हैं वह समाप्त होगा। यह बात जाने माने डाक्टर नंदिनी षंढ ने कहा। उन्होंने विश्व एड्स दिवस के अवसर पर ए़ड्स के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए एड्स से सबंधित कुछ संक्षिप्त जानकारी साझा किया है। डा. नंदिनी ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।

वर्ल्ड हैल्थ आर्गनाईजेशन(डब्ल्युएचओ) ने 1988 में अंतराष्ट्रीय स्तर पर विश्व एड्स दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से यह सिलसिला चला आ रहा है। हर साल डब्ल्यु एच ओ की ओर से हमें एक थीम दी जाती है। उस थीम पर हम काम करते हैं। इस वर्ष का थीम है
‘ टेक द राईट पथ, माई हैल्थ माई राइट ‘ इसका अर्थ है सही रास्ता अपनाओ , मेरा स्वास्थ्य मेरा अधिकार।
मेरा स्वास्थ्य मेरा अधिकार , इसमें किस अधिकार का बात किया गया है। तो इसमें आता है- मानव अधिकार , समाजिक न्याय एवं समाजिक समानता। लेकिन ये किसके लिए है। ये उन लोगों के लिए है जो एचआईवी से पीड़ित हैं और एलजीबीआईक्यू पॉजिटिव क्यूनिटी या हाई रिस्क केटेगरी में आते हैं।
आज के समय में अगर देखेंगे तो विश्व में करीब 3.9 करोड़ और भारत में लगभग 25 लाख लोग एचआईवी से पीड़ित है। एड्स एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो एचआईवी वायरस के कारण होती है, और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है। इसको ध्यान में रखते हुए डब्ल्युएचओ ने इस भयंकर बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने, शिक्षित करने एवं बीमारी से बचाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाने की घोषणा की थी।
एड्स के लक्ष्ण
जब यह वायरस आपके शरीर में प्रवेश करता है। उसके कुछ समय बाद ही लक्ष्ण देखने को मिलता है। हाई फीवर,पसीना आना,थकान, उल्टी दस्त, शरीर में खुजली, जीभ में फंगल इंफेक्शन ये कुछ शुरुआती लक्ष्ण है।
एड्स में बरती जाने वाली सावधानियां
अगर बुखार, दस्त लगातार एक महीने तक हो , इसे नजरअंदाज न करें। समय रहते ईलाज करवाएं वरना ये गंभीर रुप ले सकती है। हालांकि एचआईवी का कोई ईलाज तो नहीं है, लेकिन एचआईवी उपचार आपके शरीर में एचआईवी की मात्रा को कम कर सकता है। ज्यादातर लोग 6 महीने के भीतर एचआईवी को नियंत्रित कर सकते हैं। और दूसरों को संक्रमण से बचा सकते हैं और यह आपको स्वास्थ्य रहने में मदद कर सकता है। इसलिए समय पर जांच कराना चाहिए।
इसलिए हमें एड्स के बारे में मिथकी को तोड़ने और सही जानकारी फैलाने की आवश्यकता है। घातक बीमारी के प्रति जागरुकता लाएं। एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति के साथ भेदभाव न करें। उसे भी सम्मान दें,साथ दें। उसे समाज से अलग न करें। तभी हम एक साकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, जो 2030 तक एड्स महामारी को समाप्त करने का लक्ष्य है उसे प्राप्त कर सकते हैं।




