अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़
छेरकाबांधा स्थित प्लांट में उत्पादन बंद, स्प्रिट की कमी से बॉटलिंग यूनिट भी प्रभावित होने की आशंका
बिलासपुर। कोटा क्षेत्र के छेरकाबांधा स्थित वेलकम डिस्टिलरीज का मुख्य प्लांट पिछले करीब तीन से चार माह से बंद होने के कारण यहां काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों के अनुसार, प्लांट बंद होने से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब 800 कामगार और उनके आश्रित लगभग 4 हजार लोग प्रभावित हो रहे हैं।
मशीनों की आवाज थमी, मजदूरों की चिंता बढ़ी
प्लांट में उत्पादन बंद होने के बाद परिसर में लंबे समय से गतिविधियां प्रभावित हैं। मजदूरों का कहना है कि नियमित काम और आय पर इसका सीधा असर पड़ा है। परिवारों के सामने राशन, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
बॉटलिंग यूनिट पर भी संकट के बादल
बताया गया कि मुख्य प्लांट से उत्पादन प्रभावित होने के बाद बाहर से स्प्रिट मंगाकर बॉटलिंग का काम जारी रखने का प्रयास किया जा रहा था। अब स्प्रिट की उपलब्धता में कमी आने से बॉटलिंग यूनिट का संचालन भी प्रभावित होने की स्थिति बन रही है।
मजदूरों के अनुसार, प्लांट विभाग में करीब 200, बॉटलिंग विभाग में लगभग 450 तथा वेयरहाउस सहित अन्य विभागों में 100 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने प्रशासन से की हस्तक्षेप की मांग
मामले को लेकर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने मजदूरों के समर्थन में जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर प्लांट बंद होने के कारणों की जांच और जल्द संचालन शुरू कराने की मांग की है।
संगठन ने आशंका जताई है कि लंबे समय से संचालित प्लांट के अचानक बंद होने के पीछे किसी प्रकार की रणनीति या अन्य कारण हो सकते हैं। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग रखी है।
तकनीकी और प्रशासनिक अड़चन दूर करने की मांग
ज्ञापन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित तकनीकी रिपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच कराने की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि यदि संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा है तो उसे जल्द दूर किया जाना चाहिए, ताकि प्लांट दोबारा शुरू हो और मजदूरों को रोजगार मिल सके।
बकाया वेतन और रोजगार को लेकर उठे सवाल
मजदूरों ने प्रशासन से वेतन और रोजगार से जुड़े मामलों पर भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय तक काम प्रभावित रहने से परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। ऐसे में प्रशासन को श्रमिकों के हित में आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल
वेलकम डिस्टिलरीज का संचालन लंबे समय तक स्थानीय स्तर पर रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। ऐसे में प्लांट के लंबे समय से बंद रहने का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आसपास की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ने की चिंता जताई जा रही है।
अब मजदूरों और उनके संगठनों की निगाह जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ प्लांट संचालन को लेकर जल्द ठोस निर्णय लिया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को रोजगार और आर्थिक राहत मिल सके।




