हाईकोर्ट के सामने सड़क हादसे में 74 वर्षीय मुंशी की मौत, पांच दशक की सेवा पीछे छोड़ गए दीपक दास

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अभिषेक कुमार पाण्डेय

रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

वकालत जगत में फाइलिंग के माहिर माने जाते थे दीपक दास मानिकपुरी, हादसे ने अधिवक्ता समुदाय और परिचितों को किया स्तब्ध

बिलासपुर। न्याय और कानून की दुनिया में अपनी पूरी जिंदगी खपा देने वाले 74 वर्षीय दीपक दास मानिकपुरी की सड़क हादसे में मौत ने अधिवक्ता समुदाय और उनके परिचितों को गहरे सदमे में डाल दिया। बताया गया कि बिलासपुर हाईकोर्ट के मुख्य द्वार के सामने गुरुवार को एक सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।

दीपक दास मानिकपुरी ने करीब पांच दशक तक अधिवक्ताओं के साथ मुंशी के रूप में काम किया। लंबे समय तक न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़े रहने के कारण वे अधिवक्ताओं और पक्षकारों के बीच परिचित चेहरा थे।

फाइलिंग के काम में थी विशेष पकड़

दीपक दास मानिकपुरी को न्यायालयीन फाइलिंग की प्रक्रिया की अच्छी समझ थी। उनके साथ काम कर चुके लोगों के अनुसार, फाइल तैयार करने से लेकर न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के काम में उनकी विशेष दक्षता थी।

उनकी कार्यशैली और अनुभव के कारण कई अधिवक्ता लंबे समय तक उनकी सेवाओं पर भरोसा करते रहे। उम्र बढ़ने के बावजूद वे सक्रिय रूप से अपना काम करते रहे।

हादसे ने परिवार और परिचितों को झकझोरा

जानकारी के अनुसार, काम समाप्त करने के बाद वे घर की ओर जा रहे थे, तभी हाईकोर्ट के सामने सड़क हादसा हो गया। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। बाद में उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद उनके परिवार, परिचितों और अधिवक्ता समुदाय में शोक का माहौल है। पांच दशक तक न्यायालय परिसर से जुड़े रहे एक अनुभवी व्यक्ति का इस तरह चले जाना उनके साथ काम करने वाले लोगों के लिए भावुक कर देने वाला है।

पांच दशक की सेवा के बाद भी आर्थिक सुरक्षा का सवाल

दीपक दास मानिकपुरी का जीवन उन हजारों अनौपचारिक और सहयोगी कर्मचारियों की स्थिति पर भी सवाल खड़ा करता है, जो वर्षों तक न्यायिक और पेशेवर संस्थानों से जुड़े रहकर अपनी सेवाएं देते हैं। लंबे समय तक काम करने के बावजूद ऐसे कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और वृद्धावस्था में सहायता जैसे विषय महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

उनके निधन के बाद अब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और भविष्य को लेकर भी चिंता सामने आ रही है। ऐसे में अधिवक्ता समुदाय और प्रशासन की ओर से परिवार को किस तरह की सहायता मिलती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

हादसे की जांच और जिम्मेदारी पर भी नजर

सड़क दुर्घटना के कारणों की पुलिस जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। वाहन चालक की भूमिका, दुर्घटना की परिस्थितियां और अन्य तथ्यों की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

साथ ही, इस घटना ने हाईकोर्ट क्षेत्र में यातायात व्यवस्था और पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय परिसर के आसपास यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत पर भी चर्चा हो रही है।

सहकर्मी ने साझा की भावुक स्मृति

दीपक दास मानिकपुरी के साथ काम कर चुके एक व्यक्ति ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं उनके साथ कुछ समय काम किया है। उनके अनुसार, मानिकपुरी जी बेहद बुद्धिजीवी और व्यवहारकुशल व्यक्ति थे तथा कानून के क्षेत्र में फाइलिंग के काम में उन्हें विशेष महारत हासिल थी।

उन्होंने भावुक होकर कहा, “प्रभु उनको अपने श्री चरणों में स्थान दें।”

पांच दशक की मेहनत की याद छोड़ गए दीपक दास

दीपक दास मानिकपुरी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन न्यायालयीन गलियारों और उनके साथ काम करने वाले लोगों की स्मृतियों में उनकी पांच दशक लंबी सेवा हमेशा बनी रहेगी। उनके निधन ने एक परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है और साथ ही उन लोगों की ओर भी ध्यान खींचा है, जो पर्दे के पीछे रहकर न्याय व्यवस्था को सुचारु बनाने में वर्षों तक अपनी भूमिका निभाते हैं।

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