सिर्फ प्रशासन नहीं, नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण
सुंदरगढ़। बरसात का मौसम पूरे शबाब पर है और सुंदरगढ़ जिले में लगभग प्रतिदिन कहीं न कहीं बारिश हो रही है। बारिश के साथ कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या भी सामने आ रही है। हालांकि सरकार और स्थानीय निकायों द्वारा जल निकासी के लिए नालियों और नालों की व्यवस्था की गई है, फिर भी कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें और मोहल्ले पानी से भर जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर इसकी वजह क्या है?
वास्तविकता यह है कि इस समस्या के लिए केवल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। काफी हद तक हम नागरिक भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। वर्षभर लोग घरेलू कचरा, प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, खाने के रैपर और अन्य अपशिष्ट नालियों व नालों में फेंकते रहते हैं। धीरे-धीरे ये नालियां पूरी तरह जाम हो जाती हैं और बारिश के समय पानी की निकासी रुक जाती है। परिणामस्वरूप थोड़ी सी वर्षा में भी जलभराव की स्थिति बन जाती है।
बरसात के दौरान जब पानी सड़कों और बस्तियों में भर जाता है, तब इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो जाते हैं। लेकिन समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
यदि प्रत्येक व्यक्ति यह संकल्प ले कि वह नालियों और नालों में कचरा नहीं डालेगा तथा केवल निर्धारित कूड़ेदान का ही उपयोग करेगा, तो जल निकासी व्यवस्था काफी हद तक बेहतर हो सकती है। वर्तमान समय में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी कूड़ेदान और सफाईकर्मियों की व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में घरों का कचरा सफाईकर्मियों को सौंपना ही सबसे उचित तरीका है।
खबरसार की सभी नागरिकों से अपील है कि नालियों और नालों को कूड़ादान न बनाएं। विशेष रूप से प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, खाने के रैपर और अन्य ठोस कचरा इनमें न फेंकें। स्वच्छ नालियां ही जलभराव से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय हैं। आइए, स्वच्छता और जिम्मेदारी के साथ अपने शहर और गांव को जलभराव मुक्त बनाने में सहयोग करें।




