बारिश में कीचड़ से बदहाल निर्माणाधीन सड़क, निरीक्षण नहीं करने और अवैध मिट्टी-रेत उपयोग के आरोप
अंबिकापुर/बलरामपुर। NH 343 Road Construction परियोजना के तहत अंबिकापुर से रामानुजगंज तक बनने वाली करीब 596.94 करोड़ रुपये की टू-लेन सड़क का निर्माण कार्य इन दिनों सवालों के घेरे में है। बारिश के बीच निर्माणाधीन सड़क पर कीचड़ और फिसलन के कारण स्कूली बच्चों एवं दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बरियों पुलिस चौकी से बघिमा मंदिर तक सड़क पर डाली गई मिट्टी बारिश के बाद दलदल में बदल गई है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
दो चरणों में बन रही है 78 किलोमीटर लंबी सड़क
परियोजना के तहत अंबिकापुर से रजपुरीखुर्द पाड़ी तक 49 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 397.44 करोड़ रुपये तथा बलरामपुर बड़कीमहरी से रामानुजगंज तक 29.43 किलोमीटर सड़क का निर्माण 199.50 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। नई सड़क 12 मीटर चौड़ी होगी। साथ ही शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जल निकासी के लिए पक्की नालियां एवं पेवर ब्लॉक भी बनाए जा रहे हैं।
निरीक्षण नहीं होने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारी नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि सड़क, नाली, पुल और पुलिया निर्माण का कार्य उप-ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया गया है, जबकि विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचने के बजाय कार्यालय से ही कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
अवैध मिट्टी और रेत उपयोग का आरोप
समाचार के अनुसार, निर्माण कार्य में वन एवं राजस्व विभाग की भूमि से मिट्टी और रेत निकालकर उपयोग किए जाने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि इसके लिए संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।
खनिज रॉयल्टी नहीं चुकाने का भी दावा
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण में बड़ी मात्रा में गिट्टी, मिट्टी और रेत का उपयोग किया गया, लेकिन खनिज विभाग को निर्धारित रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया गया। इससे शासन को राजस्व हानि होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लोगों ने की त्वरित कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच, नियमित निरीक्षण, जलभराव एवं फिसलन की समस्या का तत्काल समाधान तथा निर्माण कार्य में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान आम नागरिकों, विशेषकर स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।




