पुसौर क्षेत्र में वर्ष 2024 में हुई घटना पर विशेष न्यायालय का फैसला, अभियोजन की पैरवी और विवेचना के आधार पर आरोपियों को सजा
रायगढ़, 29 सितंबर। पुसौर थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में महिला से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी एक्ट), रायगढ़ ने 28 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए छह आरोपियों को दोषसिद्ध किया है। न्यायालय ने दो आरोपियों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास तथा चार अन्य आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म और विधि विरुद्ध जमाव से संबंधित धाराओं में 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
छह आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में सजा
न्यायालय के निर्णय के अनुसार सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास से दंडित किया गया है।
वहीं कृष्णा उर्फ राहुल चौहान, नरेन्द्र उर्फ छोटू सिदार, बबलू चौहान और राहुल खड़िया को भारतीय न्याय संहिता की धारा 70(1) तथा धारा 190 के तहत 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है।
मेला देखने जा रही महिला से घटना का आरोप
पुलिस के अनुसार घटना 19 अगस्त 2024 की शाम की है। अभियोजन के मुताबिक पीड़िता अकेले पैदल मेला देखने जा रही थी। इसी दौरान मुख्य मार्ग पर उसकी मुलाकात पूर्व परिचित आरोपी कृष्णा उर्फ राहुल चौहान और उसके साथियों से हुई।
आरोप है कि आरोपियों ने महिला को जबरन तालाब की ओर ले गए, जहां अन्य युवक भी पहुंचे। पुलिस के अनुसार वहां महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद महिला किसी तरह वहां से निकलकर गांव की महिलाओं के पास पहुंची और उन्हें घटना की जानकारी दी।
इसके बाद सरपंच को सूचना दी गई और 20 अगस्त 2024 को पुसौर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
जांच में 9 आरोपियों की पहचान
पुलिस के मुताबिक मामले में अपराध क्रमांक 194/2024 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में जांच शुरू की गई। विवेचना के दौरान कुल 9 आरोपियों की पहचान हुई। इनमें से 8 को पकड़ा गया, जबकि दो आरोपी विधि से संघर्षरत बालक पाए गए।
एक अन्य विधि से संघर्षरत बालक के फरार रहने के दौरान मृत्यु हो जाने के कारण उसे प्रकरण से पृथक किया गया। दोनों विधि से संघर्षरत बालकों के संबंध में अलग से किशोर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
मामले की प्रारंभिक जांच तत्कालीन पुसौर थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित बंजारे द्वारा की गई। इसके बाद तत्कालीन CSP रायगढ़ आकाश शुक्ला (IPS) ने विवेचना आगे बढ़ाई।
दो आरोपियों पर एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं
विवेचना के दौरान सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं 3(1)(s), 3(1)(r) और 3(2)(v) जोड़ी गईं। जांच पूरी होने के बाद सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
साक्षियों की न्यायालय में उपस्थिति पर पुलिस ने दिया जोर
पुलिस के अनुसार वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में मामले से जुड़े साक्षियों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराई गई। पुलिस का कहना है कि इससे अभियोजन पक्ष को न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान आवश्यक आधार मिला।
विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल द्वारा मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की गई। पुलिस के अनुसार विवेचना और अभियोजन की कार्यवाही के बाद न्यायालय ने छह आरोपियों को दोषसिद्ध करते हुए सजा सुनाई।
पीड़िता को प्रतिकर दिए जाने की अनुशंसा
न्यायालय ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति योजना के तहत नियमानुसार प्रतिकर राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह का संदेश
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं और कमजोर वर्गों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों में पुलिस संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करती है। ऐसे मामलों में साक्ष्य आधारित विवेचना, आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायालय में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायालय द्वारा आरोपियों को दंडित किया जाना पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
