TEDx के वैश्विक मंच पर गूंजी बिलासपुर की सायना उभरानी की आवाज

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‘Are We Raising Achievers or Thinkers?’ विषय पर साझा किए विचार, बच्चों में जिज्ञासा और स्वतंत्र सोच विकसित करने पर दिया जोर

बिलासपुर, छत्तीसगढ़। बिलासपुर की शिक्षाविद्, उद्यमी, लेखिका और वक्ता सायना उभरानी ने कर्नाटक के दावणगेरे में आयोजित TEDxDavangere के मंच पर शिक्षा और बच्चों के समग्र विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्हें PSSEMR School & PU College द्वारा आयोजित TEDx कार्यक्रम में वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।

सायना ने अपने संबोधन में “Are We Raising Achievers or Thinkers?” विषय पर चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की सफलता का आकलन केवल परीक्षा, अंक और शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार बच्चों में जिज्ञासा, स्वतंत्र सोच, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और व्यावहारिक जीवन कौशल का विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

बच्चों को सवाल पूछने और सोचने का अवसर देने पर जोर

अपने संबोधन के दौरान सायना उभरानी ने अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को समझने और उन्हें अपनी बात रखने के साथ-साथ सवाल पूछने का अवसर देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि बच्चों को हर परिस्थिति में तैयार जवाब देने के बजाय स्वयं सोचने, नए सवाल तलाशने और समस्याओं का समाधान खोजने के अवसर मिलना चाहिए। इससे उनमें निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास विकसित हो सकता है।

शिक्षा के क्षेत्र में करीब दो दशक का अनुभव

सायना उभरानी Chocolate Kids Preschool, Bilaspur की सह-संस्थापक एवं निदेशक हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्हें लगभग दो दशकों का अनुभव है। उन्होंने मार्केटिंग एवं फाइनेंस में MBA किया है और “Good to Be Embarrassed” पुस्तक की लेखिका भी हैं।

वर्ष 2013 से वे बच्चों और अभिभावकों के साथ शिक्षा एवं पालन-पोषण से जुड़े विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उनके काम का केंद्र बच्चों की सीखने की प्रक्रिया, अभिभावक-शिक्षक की भूमिका और बच्चों के समग्र विकास जैसे विषय रहे हैं।

TEDx मंच पर बिलासपुर की भागीदारी

TEDx विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े वक्ताओं को अपने अनुभव, विचार और दृष्टिकोण साझा करने का मंच उपलब्ध कराता है। दावणगेरे में आयोजित TEDx कार्यक्रम में सायना उभरानी की सहभागिता ने बिलासपुर की शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों को व्यापक मंच पर सामने रखा।

उनका संबोधन बच्चों को केवल उपलब्धियां हासिल करने के लिए तैयार करने के बजाय उन्हें सोचने, सवाल करने और सीखने की स्वतंत्रता देने की आवश्यकता पर केंद्रित रहा।

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