सांकरा की रात्रि चौपाल बनी प्रेरणा का मंच:

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कलेक्टर ने ‘पर्यावरण प्रहरी’ नारायण साहू को बगल में बिठाकर किया सम्मानित…

सारंगढ़ । ग्राम सांकरा में आयोजित रात्रिकालीन जन चौपाल केवल समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और जनसेवा के सम्मान का ऐतिहासिक क्षण भी बन गई। जिला कलेक्टर संजय कन्नौजे ने चौपाल के दौरान पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले नारायण साहू को मंच पर अपने बगल में बैठाकर सम्मानित किया, जिससे पूरे गांव में गर्व और उत्साह का माहौल बन गया।

हजारों पेड़ों को दिया जीवन, स्कूल परिसर को बनाया हराभरा-

गुड़ी पारा, सांकरा निवासी नारायण साहू (पिता मदन साहू) ने बिना किसी सरकारी सहायता या निजी स्वार्थ के स्कूल परिसर सहित विभिन्न स्थानों पर हजारों पौधे रोपे हैं। आज वे पौधे विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं और फल देने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नारायण साहू इन वृक्षों की देखभाल अपनी संतान की तरह करते हैं। भीषण गर्मी हो या बरसात, वे नियमित रूप से पानी देना, सुरक्षा करना और पौधों को संरक्षित रखना अपना कर्तव्य मानते हैं।

कलेक्टर ने दिया विशेष सम्मान, अधिकारियों को किए निर्देश
जब चौपाल में नारायण साहू के कार्यों की जानकारी कलेक्टर संजय कन्नौजे को मिली, तो उन्होंने तत्काल उन्हें मंच पर बुलाया।

प्रोटोकॉल से परे सम्मान-

कलेक्टर ने स्वयं की बगल वाली कुर्सी पर उन्हें बैठाकर यह संदेश दिया कि समाजसेवा करने वाला नागरिक शासन की प्राथमिकता है।

मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि नारायण साहू का नाम विशेष सम्मान हेतु सूचीबद्ध किया जाए और उन्हें उचित मंच पर सम्मानित करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।

कलेक्टर ने कहा —

“नारायण साहू जैसे लोग समाज की असली धरोहर हैं। वे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण और फलदार वृक्षों की सौगात दे रहे हैं। प्रशासन ऐसे कर्मठ और निस्वार्थ नागरिकों का हमेशा सम्मान करेगा।”

जनता के बीच संवेदनशील प्रशासन की छवि मजबूत-

रात्रि चौपाल में कलेक्टर की यह पहल केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि शासन उन लोगों के साथ खड़ा है जो समाज के लिए सकारात्मक कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि कलेक्टर संजय कन्नौजे की कार्यशैली अलग है वे केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं करते, बल्कि जमीनी स्तर पर अच्छे कार्यों को पहचानकर उनका मनोबल भी बढ़ाते हैं। सांकरा की यह चौपाल अब केवल प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की मिसाल बन गई है।

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