संवाददाता: अभिषेक कुमार पाण्डेय
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
बिलासपुर। कोनी क्षेत्र के 121 स्ट्रीट वेंडर्स को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। नगर निगम की ओर से की जा रही बेदखली कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि स्ट्रीट वेंडर्स को हटाने से पहले कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। कोर्ट ने नगर निगम को वेंडर्स के लिए उपयुक्त वेंडिंग जोन तय करने और आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए 90 दिन का समय दिया है।
बेदखली नोटिस को व्यापारी संघ ने दी थी चुनौती
मामला छत्तीसगढ़ बिलासपुर कोनी व्यापारी कल्याण संघ की ओर से नगर निगम द्वारा जारी बेदखली और दुकान हटाने के नोटिस को चुनौती दिए जाने से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार कोनी क्षेत्र में करीब 121 छोटे कारोबारी लंबे समय से दुकान, ठेला और गुमटी लगाकर व्यवसाय कर रहे हैं।
व्यापारियों का आरोप था कि नगर निगम ने उन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी, जबकि उनके पुनर्वास या वैकल्पिक वेंडिंग व्यवस्था के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया था।
पहले सर्वे और वेंडिंग जोन तय करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल नोटिस जारी कर किसी स्ट्रीट वेंडर को उसकी आजीविका के स्थान से हटाना उचित नहीं होगा। बेदखली से पहले संबंधित वेंडर्स को सुनवाई का अवसर देने और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है।
कोर्ट ने नगर निगम को संबंधित वेंडर्स का सर्वे कराने और उनके लिए उपयुक्त वेंडिंग जोन की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार पुनर्वास या स्थानांतरण की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
90 दिन तक जारी रहेगी अंतरिम राहत
हाईकोर्ट ने नगर निगम को वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए 90 दिन का समय दिया है। इस अवधि में निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर उचित आदेश पारित किए जाने तक वेंडर्स को मिली अंतरिम सुरक्षा प्रभावी रहेगी।
इस आदेश के बाद कोनी क्षेत्र के 121 छोटे कारोबारियों को तत्काल बेदखली की कार्रवाई से राहत मिल गई है।
सड़क से 10 से 15 फीट दूर दुकानें होने का दावा
व्यापारी संघ की ओर से कोर्ट में बताया गया कि संबंधित कारोबारी मुख्य सड़क से करीब 10 से 15 फीट की दूरी पर दुकान, ठेला और गुमटी लगाकर व्यवसाय कर रहे हैं। उनका दावा है कि इन दुकानों के कारण यातायात में कोई बड़ी बाधा उत्पन्न नहीं होती।
इसके बावजूद नगर निगम की ओर से छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 322 और 323 के तहत नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की गई थी। इसी कार्रवाई को लेकर व्यापारी संघ ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
2014 के कानून और 2016 की योजना का दिया हवाला
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 तथा छत्तीसगढ़ स्ट्रीट वेंडर्स योजना, 2016 के प्रावधानों का हवाला दिया गया। दलील दी गई कि स्ट्रीट वेंडर्स के खिलाफ कार्रवाई करते समय इन कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना आवश्यक है।
निगम को अब पूरी करनी होगी प्रक्रिया
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल नगर निगम की बेदखली कार्रवाई पर रोक है, लेकिन यह राहत स्थायी समाधान नहीं है। आने वाले 90 दिनों में निगम को सर्वे, वेंडिंग जोन का निर्धारण और अन्य आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अब यह देखना होगा कि नगर निगम इन कारोबारियों के लिए वैकल्पिक वेंडिंग व्यवस्था तैयार करता है या पुनर्वास एवं स्थानांतरण की दिशा में कदम उठाता है। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से उन 121 कारोबारियों को राहत मिली है, जिनकी आजीविका इन छोटे व्यवसायों पर निर्भर है।




