स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान धरमजयगढ़ नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, निरीक्षण के बाद दिखावे की सफाई का आरोप

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प्रतीक मल्लिक ✍️

धरमजयगढ़। दिल्ली से आई स्वच्छता सर्वेक्षण टीम के आगमन पर नगर पंचायत में मची हलचल, आनन-फानन में की गई सफाई व्यवस्था
धरमजयगढ़ नगर पंचायत की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दिल्ली से स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम के आने की सूचना मिलते ही नगर पंचायत के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बस स्टैंड और आसपास की दुकानों के सामने डस्टबिन रखवाए गए तथा सफाई व्यवस्था का दिखावा किया गया। निरीक्षण के दौरान टीम के सामने फोटो सेशन भी कराया गया।

टीम के रवाना होते ही हटाए गए डस्टबिन, स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
लेकिन जैसे ही निरीक्षण टीम रवाना हुई, नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा वही डस्टबिन वापस उठा लिए गए। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर स्थानीय दुकानदारों और आम नागरिकों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत केवल “फोटो और दिखावे की सफाई” तक ही सीमित रह गई है, जबकि वास्तविक स्थिति में नगर की सफाई व्यवस्था बदहाल बनी हुई है।

स्थानीय व्यापारियों का आरोप—टीम को गुमराह करने के लिए चलाया गया अस्थायी सफाई अभियान
स्थानीय व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि नगर पंचायत द्वारा केवल दिल्ली से आई टीम को गुमराह करने के लिए कुछ घंटों का अस्थायी स्वच्छता अभियान चलाया गया। उनका कहना है कि बस स्टैंड क्षेत्र में रोजाना कचरे का ढेर और गंदगी की समस्या बनी रहती है, लेकिन स्थायी डस्टबिन और नियमित सफाई व्यवस्था नहीं की जाती।

लोगों ने उठाए सवाल—लाखों खर्च के बावजूद क्यों दिखाई देती है केवल कागजी स्वच्छता?
आम जनता ने सवाल उठाया है कि जब नगर को स्वच्छ रखने के लिए शासन से लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, तो केवल निरीक्षण के समय ही सफाई व्यवस्था क्यों दिखाई देती है। नगर पंचायत के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर बढ़ी चर्चा, जमीनी हकीकत और दावों में अंतर पर उठे सवाल
नगर में चर्चा का विषय यह बना हुआ है कि स्वच्छता सर्वेक्षण अब केवल कागजों और फोटो तक सीमित होता जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।

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