गुड़ेली टिमरलगा क्षेत्र में प्रदूषण से मचा हाहाकार, श्री बाला जी, गाड़ोदिया, कालू भट्ठा, मां चंद्रहासिनी, मां काली, गोपाल, शाहा चुना भट्ठों में अवैध रॉयल्टी व अवैध पत्थर का खेल

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ग्रामीणों का आरोप—किसी और की रॉयल्टी पर्ची और अवैध खदान से पत्थर खरीदकर चल रहे भट्ठे, प्रशासनिक जांच नहीं होने से बढ़ी परेशानी

सारंगढ़-बिलाईगढ़। नवीन जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत गुड़ेली टिमरलगा में संचालित कई चुना भट्ठों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि श्री बाला जी, गाड़ोदिया, कालू भट्ठा, मां चंद्रहासिनी, मां काली, गोपाल और शाहा चुना भट्ठों में अवैध रॉयल्टी और अवैध पत्थर का खेल खुलेआम चल रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ संचालक किसी अन्य व्यक्ति की रॉयल्टी पर्ची खरीदकर और अवैध खदानों से पत्थर मंगवाकर भट्ठों का संचालन कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन सैकड़ों टन अवैध पत्थर ट्रैक्टर और हाईवे वाहनों के माध्यम से इन भट्ठों तक पहुंचाया जाता है। इससे क्षेत्र में धूल, धुआं और प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि सुबह से लेकर रात तक उड़ती धूल और भट्ठों से निकलने वाला धुआं सांस लेना मुश्किल कर देता है। कई बार तो दृश्यता इतनी कम हो जाती है कि सड़क पर चलना भी कठिन हो जाता है।

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन को इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक गंभीर जांच नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि कई बार क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं, लेकिन जमीनी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि वे प्रदूषण और बीमारियों के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध पत्थर की खरीद-फरोख्त में खनिज विभाग और भट्ठा संचालकों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। बताया जा रहा है कि पत्थर की कीमत प्रति टन 250 से 300 रुपये तक तय की जाती है और बड़ी मात्रा में अवैध खपत की जा रही है। इससे शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।

लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर अवैध खदानों, फर्जी रॉयल्टी पर्चियों और चुना भट्ठों के संचालन की सच्चाई सामने लाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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