सड़क निर्माण की मांग को लेकर विशेष पूजा-अर्चना, 31 जुलाई तक काम शुरू नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
लैलूँगा। केशला–तोलगे सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले मंगलवार को माँ बंजारी मंदिर, गोढ़ी चौक (सरसमाल) में जर्जर केशला–तोलगे सड़क के शीघ्र निर्माण की कामना को लेकर विशेष पूजा-अर्चना एवं सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया गया। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे नागरिकों, महिलाओं, युवाओं एवं जनप्रतिनिधियों ने माँ बंजारी के समक्ष सड़क निर्माण के लिए प्रार्थना करते हुए शासन-प्रशासन में बैठे अधिकारियों को सद्बुद्धि प्रदान करने की कामना की।
20 वर्षों से जर्जर सड़क, हजारों ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
संघर्ष समिति के अनुसार केशला–तोलगे सड़क पिछले करीब 20 वर्षों से बदहाल स्थिति में है। यह मार्ग लैलूँगा विधानसभा क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल है, जिससे लगभग 15 ग्राम पंचायतों के हजारों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। खराब सड़क के कारण विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज पहुंचने में कठिनाई होती है, मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पाता, किसान अपनी उपज बाजार तक ले जाने में परेशान रहते हैं तथा आए दिन सड़क दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं।
जनहित का आंदोलन, किसी दल से नहीं जुड़ा
संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा कि पिछले दो दशकों से केवल घोषणाएं और आश्वासन मिलते रहे, लेकिन सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों के जीवन, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा जनहित का अभियान है।
31 जुलाई तक निर्माण शुरू नहीं हुआ तो होगा व्यापक आंदोलन
पूजा-अर्चना के बाद उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर जनजागरण अभियान प्रत्येक गांव तक पहुंचाया जाएगा। समिति ने चेतावनी दी कि यदि 31 जुलाई 2026 तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
आगामी कार्ययोजना जारी
संघर्ष समिति ने 22 जुलाई से 31 जुलाई तक चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित किए हैं। इसके तहत सरपंचों एवं महिला स्व-सहायता समूहों से संपर्क, हस्ताक्षर अभियान, जनसंपर्क, जनजागरण, सोशल मीडिया अभियान, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से समर्थन तथा 31 जुलाई को प्रभावित 15 ग्राम पंचायतों में मशाल यात्रा निकाली जाएगी।
संघर्ष समिति ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि यह केवल सड़क निर्माण की मांग नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य का आंदोलन है। इसलिए सभी वर्गों—महिलाओं, युवाओं, किसानों, व्यापारियों एवं विद्यार्थियों—से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है।





