गंभीर जन्मजात बीमारी से जूझ रहे नवजात को मिला नया जीवन, 30 दिन के उपचार के बाद स्वस्थ होकर लौटा घर

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बिलासपुर। श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर की विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम ने गंभीर एवं दुर्लभ जन्मजात बीमारी बिलेट्रल कोएनल एट्रेसिया (Bilateral Choanal Atresia) से जूझ रहे एक नवजात का सफल उपचार किया। करीब एक सप्ताह वेंटिलेटर सपोर्ट, जटिल सर्जिकल उपचार और लगभग 30 दिनों की सतत चिकित्सा एवं विशेष नर्सिंग देखभाल के बाद नवजात को 8 अगस्त 2026 को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी गई।

जन्म के बाद बिगड़ी हालत
लोरमी क्षेत्र निवासी गौसिया परवीन के नवजात का जन्म 3 जुलाई 2026 को हुआ था। जन्म के तुरंत बाद उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। दोनों नासिका मार्ग जन्म से बंद होने के कारण उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी। उसी दिन परिजन उसे उपचार के लिए श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर लेकर पहुंचे।

एक सप्ताह वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहा नवजात
डॉ. श्रीकांत गिरी के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले उसकी सांस और ऑक्सीजन की स्थिति को नियंत्रित किया गया। करीब एक सप्ताह तक उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और लगातार निगरानी की गई।

क्या है Bilateral Choanal Atresia?
डॉ. श्रीकांत गिरी के अनुसार, Bilateral Choanal Atresia नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली दुर्लभ जन्मजात स्थिति है, जिसमें नाक के दोनों पिछले वायुमार्ग जन्म से ही बंद रहते हैं। ऐसी स्थिति में नवजात को सांस लेने में गंभीर परेशानी और ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

जटिल सर्जरी के बाद लगातार निगरानी
बच्चे की स्थिति स्थिर होने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक तैयारी के साथ जटिल सर्जिकल उपचार किया। सर्जरी के बाद भी नवजात को विशेष निगरानी और नर्सिंग देखभाल में रखा गया। करीब 30 दिनों की सतत चिकित्सा के बाद बच्चे ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया और 8 अगस्त को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

चिकित्सकीय टीम की रही अहम भूमिका
इस चुनौतीपूर्ण उपचार में डॉ. श्रीकांत गिरी, डॉ. रवि द्विवेदी, डॉ. अंकित ठकराल, डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. विशाल मांझी और डॉ. मोनिका जायसवाल सहित पूरी चिकित्सकीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधक नवल वर्मा के मार्गदर्शन में नर्सिंग एवं सपोर्ट स्टाफ ने भी नवजात की देखभाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

स्वस्थ बच्चे को देखकर भावुक हुए माता-पिता
करीब एक महीने के उपचार के बाद जब नवजात स्वस्थ होकर घर लौटा तो माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल की पूरी टीम के प्रति आभार जताया। यह मामला समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सा, सतत निगरानी और टीमवर्क का उदाहरण बना।

रिपोर्ट : अभिषेक कुमार पाण्डेय
जिला संवाददाता, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
दिनांक : 09 अगस्त 2026

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